अमेरिका के द्वारा लगाए गए टैरिफ का भारत ने सफलतापूर्वक सामना किया है। इस टैरिफ के बाद भी भारत 2025-26 में तेजी से आगे बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बनने में सफल रहा है। लेकिन आर्थिक विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिकी टैरिफ ने भारत के व्यापार को प्रभावित किया है। यदि अमेरिकी अड़ंगा न होता तो भारत इससे भी बेहतर बढ़त हासिल करने में सफल हो सकता था। इसी तरह चीन ने भी ‘रेयर अर्थ मेटल’ की सप्लाई रोककर भारत सहित पूरी दुनिया के सामने संकट खड़ा कर दिया था। लेकिन भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच होने जा रहे समझौते से अमेरिका-चीन की समस्याओं का दीर्घकालिक समाधान मिल सकता है। यदि भारत-यूरोपीय यूनियन के बीच डील सही तरीके से अपने अंजाम पर पहुंची तो इससे अमेरिका पर भी दबाव पड़ने की संभावना है। 27 जनवरी को उच्च स्तरीय बैठक भारत और यूरोपीय यूनियन के उच्चाधिकारियों की एक शीर्ष बैठक 27 जनवरी को नई दिल्ली में होगी। इस बैठक में भारत की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हिस्सा लेंगे। यूरोपीय काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर येलेन इसमें हिस्सा लेंगे। ये दोनों मेहमान गणतंत्र दिवस समारोह पर मुख्य अतिथि भी होंगे। उर्सुला ने यूरोपीय यूनियन और भारत के बीच होने वाले व्यापार समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा है। इससे यह संकेत मिलते हैं कि दोनों व्यापारिक साझेदार बड़े व्यापारिक समझौते कर सकते हैं जो दोनों पक्षों के हित में होंगे। हालांकि, केवल इसी दौरे में सब कुछ हो जाएगा, इस तरह की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए। उर्सुला वॉन डेर येलेन ने कहा है कि दोनों देशों के बीच समझौते में अभी भी कई अहम उपाय किए जाने शेष हैं, लेकिन एक बेहतर समझौते तक पहुंचने में यह बैठक मील क …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
EU-India: अमेरिका-चीन ने खड़ी की समस्या, यूरोप से मिलेगा समाधान! भारत के लिए क्यों जरूरी है ये समझौता?
अमेरिका के द्वारा लगाए गए टैरिफ का भारत ने सफलतापूर्वक सामना किया है। इस टैरिफ के बाद भी भारत 2025-26 में तेजी से आगे बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बनने में सफल रहा है। लेकिन आर्थिक विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिकी टैरिफ ने भारत के व्यापार को प्रभावित किया है। यदि अमेरिकी अड़ंगा न होता तो भारत इससे भी बेहतर बढ़त हासिल करने में सफल हो सकता था। इसी तरह चीन ने भी 'रेयर अर्थ मेटल' की सप्लाई रोककर भारत सहित पूरी दुनिया के सामने संकट खड़ा कर दिया था। लेकिन भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच होने जा रहे समझौते से अम