भोजशाला से जुड़ी भावनाओं का आलम यह है कि दोनों ही समुदाय अपनी-अपनी परंपराओं को अंजाम तक पहुंचाने के लिए कायम हैं। एक तरफ हिंदू समाज की मांग है कि सूर्योदय से सूर्यास्त तक मां सरस्वती की अखंड पूजा और हवन में कोई बाधा न आए, जिसके लिए लगातार यात्राएं निकालकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई जा रही है। वहीं दूसरी ओर मुस्लिम समाज का कहना है कि उन्हें कई वर्षों से शुक्रवार की नमाज अदा करने की अनुमति है और वे बिना किसी डर के इबादत करना चाहते हैं, हालांकि समाज ने सांकेतिक पूजा की बात भी कही है। क्या है भोजशाला विवाद, आइए जानते हैं धार में भोजशाला का निर्माण 1010 से 1055 ईसवीं के बीच परमार वंश के राजा भोज ने करवाया था। राजा भोज की मृत्यु के 200 साल तक यहां पठन-पाठन का कार्य होता रहा। राजा भोज ने यहां देवी सरस्वती (वाग्देवी) की मूर्ति स्थापित कराई थी, जो 84 कलात्मक स्तंभों पर खड़ी थी। 1857 में एक ब्रिटिश अधिकारी यह मूर्ति इंग्लैंड ले गए। यह मूर्ति आज वहां मौजूद है। भोजशाला परिसर में कमाल मौला मस्जिद भी है। केंद्रीय पुरातत्व विभाग के अनुसार भोजशाला में मंगलवार को हिंदू पक्ष को पूजा-अर्चना करने की अनुमति है। शुक्रवार को मुस्लिम पक्ष को नमाज पढ़ने के लिए दोपहर 1 से 3 बजे तक प्रवेश दिया जाता है। इसके लिए दोनों पक्षों को नि:शुल्क प्रवेश मिलता है। बाकी दिनों में एक रुपये का टिकट लगता है। इसके अलावा बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा के लिए हिंदू पक्ष को पूरे दिन पूजा और हवन करने की अनुमति है। 2006 में बिगड़ी स्थिति पुरातत्व विभाग के आदेश के बाद 3 फरवरी 2006 को जब बसंत पंचमी शुक्रवार को आई तो उस समय की चुनौतियों और शांति कायम करने के लिए तगड़ा पुलिस बल लगाया गया, लेकिन विवाद हुआ। अफसरों के सामने यह चुनौती …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
Dhar Bhojshala: बसंत पंचमी और जुमे की नमाज के बीच धार के धैर्य की परीक्षा, इतिहास के कड़वे जख्म बढ़ा रहे चिंता
भोजशाला से जुड़ी भावनाओं का आलम यह है कि दोनों ही समुदाय अपनी-अपनी परंपराओं को अंजाम तक पहुंचाने के लिए कायम हैं। एक तरफ हिंदू समाज की मांग है कि सूर्योदय से सूर्यास्त तक मां सरस्वती की अखंड पूजा और हवन में कोई बाधा न आए, जिसके लिए लगातार यात्राएं निकालकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई जा रही है। वहीं दूसरी ओर मुस्लिम समाज का कहना है कि उन्हें कई वर्षों से शुक्रवार की नमाज अदा करने की अनुमति है और वे बिना किसी डर के इबादत करना चाहते हैं, हालांकि समाज ने सांकेतिक पूजा की बात भी कही है। क्या है भोजशाला व