सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को आवारा कुत्तों के मामले पर सुनवाई की। इस दौरान एक वकील ने दलील देते हुए कहा कि नगर पालिका के अधिकारी कूड़ा नहीं उठाते हैं, जिसकी वजह से वहां कुत्ते इकट्ठा हो जाते हैं। वकील ने कहा कि शहरीकरण की वजह से कूड़ा बढ़ा है। शीर्ष अदालत में न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ के समक्ष आवारा कुत्तों के मामले की सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई के दौरान पीठ ने मुख्य रूप से संस्थागत परिसरों में आवारा कुत्तों के मुद्दे और नगर निगम अधिकारियों की विफलता पर ध्यान दिया। लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक आवारा कुत्तों के मामले में सुनवाई के दौरान एक अन्य वकील ने दलील देते हुए कहा कि नसबंदी आदि की जिम्मेदारी अधिकारियों की है। वहीं, मेनका गांधी की ओर से पेश हुए वकील रामचंद्रन की एक दलील पर न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने सवाल पूछते हुए कहा, ‘आपकी मुवक्किल मंत्री रह चुकी हैं और पशु अधिकार कार्यकर्ता हैं। हमें बताएं कि आपके आवेदन में बजट आवंटन का जिक्र क्यों नहीं है। इन क्षेत्रों में आपके मुवक्किल का क्या योगदान रहा है?’ इस पर वकील रामचंद्रन ने कहा कि मैं इसका मौखिक उत्तर नहीं दे सकता।जस्टिस ने आवारा कुत्तों के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की आलोचना करने वाली टिप्पणियों पर नाराजगी जताई, और ये भी कहा कि उन्होंने कोर्ट की अवमानना की है। जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एन वी अंजारिया की बेंच ने कहा कि पूर्व मंत्री ने बिना सोचे-समझे सबके खिलाफ हर तरह की टिप्पणियां की हैं। गांधी की तरफ से पेश हुए सीनियर वकील राजू रामचंद्रन से सवाल करते हुए बेंच ने कहा कि आपने कहा कि कोर्ट को अपनी टिप्पणी में सावधान रहना चाहिए, लेक …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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