मिस्री ने कहा कि व्यापार और निवेश के क्षेत्र में भी कई पहलें तेज करने पर सहमति बनी। इनमें भारत मार्ट, वर्चुअल ट्रेड कॉरिडोर और भारत-अफ्रीका एसईटीयू पहल शामिल हैं। यूएई की कंपनियों डीपी वर्ल्ड और फर्स्ट अबू धाबी बैंक को गिफ्ट सिटी, गुजरात में अपने कार्यालय और संचालन खोलने की अनुमति दी गई है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि दोनों देशों ने राष्ट्रीय भुगतान प्लेटफार्मों के इंटरकनेक्शन पर काम करने और व्यापार को बढ़ावा देने का निर्णय लिया।बता दें कि इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद ने भारत-यूएई के बीच द्विपक्षीय सहयोग के सभी पहलुओं की समीक्षा की। दोनों नेताओं ने कहा कि बीते एक दशक में भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हुई है। बैठक में दोनों नेताओं ने हाल के वर्षों में हुए उच्चस्तरीय दौरों का भी स्वागत किया।उन्होंने पिछले दो वर्षों में अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और दुबई के क्राउन प्रिंस, यूएई के उप प्रधानमंत्री व रक्षा मंत्री शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम के भारत दौरे का उल्लेख किया। दोनों नेताओं ने कहा कि इन दौरों से भारत-यूएई संबंधों में पीढ़ीगत निरंतरता दिखाई देती है और यह साझेदारी आने वाले समय में और मजबूत होगी।विक्रम मिस्री ने आगे कहा कि एक और महत्वपूर्ण पहल के तहत, अबू धाबी में ‘हाउस ऑफ इंडिया’ स्थापित करने का निर्णय लिया गया। यह एक विशेष सांस्कृतिक केंद्र और आधुनिक संग्रहालय होगा, जो भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत और भारत-यूएई साझेदारी का प्रतीक होगा। उन्होंने कहा कि व्यापार के क्षेत्र में, 2022 में हुए व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) के बाद, दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्याप …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

मूल लेख स्रोत पर पढ़ें