यूरोपियन पीपल्स पार्टी के उपाध्यक्ष सीगफ्राइड मुरेसान ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में लिखा, हमें पिछली जुलाई में शुरू हुए अमेरिका-यूरोपीय संघ व्यापार समझौते को जल्द पूरा करना था, जिससे अमेरिका से यूरोप आने वाले सामान पर टैरिफ घटकर शून्य प्रतिशत हो जाता। हालांकि हाल के घटनाक्रमों को देखते हुए, व्यापार समझौते को पूरा होने के लिए अभी और इंतजार करना होगा।’ मुरेसान ने आगे लिखा, ‘अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार समझौते से स्थिरता ही एकमात्र फायदा होता। अब राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा आज कई यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की घोषणा से वह स्थिरता भी खत्म हो गई है। इसलिए फिलहाल उस व्यापार समझौते पर बातचीत रोकना ही ठीक है।’ अमेरिका और यूरोप के 27 देशों के बीच विभिन्न टैरिफ और व्यापार मुद्दों को सुलझाने के लिए व्यापार समझौते पर बातचीत शुरू हुई थी। हालांकि ग्रीनलैंड के मुद्दे पर अमेरिका की धमकी और उस पर यूरोपीय देशों के अड़ियल रुख ने हालात को बिगाड़ दिया है। इस बीच जर्मनी, स्वीडन, फ्रांस, नॉर्वे, नीदरलैंड और फिनलैंड जैसे देशों ने ग्रीनलैंड में अपने सैन्य कर्मियों को तैनात किया है। हालांकि ये तैनाती अभी थोड़ी संख्या में है। अमेरिका की धमकी के बाद डेनमार्क ने भी ग्रीनलैंड में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा दी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड पर कब्जे की जिद नाटो के पतन का कारण बन सकती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डेनमार्क और अन्य यूरोपीय देशों को ग्रीनलैंड के मुद्दे पर समर्थन न देने पर टैरिफ लगाने की धमकी दी है। ट्रंप ने शनिवार को सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में लिखा कि ग्रीनलैंड पर अमेरिका का कब्जा राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम है। ट्र …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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