पश्चिम बंगाल के सिंगूर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली के बाद राज्य की राजनीति में तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। तृणमूल कांग्रेस ने प्रधानमंत्री पर झूठ फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा है कि घुसपैठ को लेकर जो दावे किए जा रहे हैं, उनका ज़मीनी हकीकत से कोई मेल नहीं है। टीएमसी का कहना है कि केंद्र सरकार चुनावी माहौल में डर और भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रही है। टीएमसी ने चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया का हवाला दिया। इस जांच के दौरान करीब 58 लाख वोटरों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए। टीएमसी का कहना है कि एक भी मामला घुसपैठ से नहीं जुड़ा पाया गया। टीएमसी का दावा है कि जांच में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी नागरिक नहीं मिले। पार्टी के अनुसार कोई भी रोहिंग्या मतदाता सूची में सामने नहीं आया। टीएमसी के प्रदेश अध्यक्ष जॉय प्रकाश मजूमदार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले 11 साल से घुसपैठ, बांग्लादेशी और रोहिंग्या का मुद्दा दोहराते आ रहे हैं, लेकिन अब तक इसके ठोस सबूत सामने नहीं आए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सीमा सुरक्षा केंद्र के अधीन है, तो फिर राज्य सरकार को ही कटघरे में क्यों खड़ा किया जा रहा है। कानून-व्यवस्था और महिला अपराध पर भी पलटवार प्रधानमंत्री द्वारा बंगाल में कानून-व्यवस्था और महिलाओं के खिलाफ अपराध को लेकर उठाए गए सवालों पर भी टीएमसी ने जवाब दिया। पार्टी ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे राज्यों में हालात बंगाल से कहीं ज्यादा गंभीर हैं। टीएमसी का आरोप है कि चुनिंदा आंकड़ों के जरिए बंगाल की छवि खराब की जा रही है। टीएमसी ने प्रधानमंत्री स …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
सिंगूर की सियासत गरमाई: पीएम मोदी के घुसपैठ वाले बयान पर टीएमसी का पलटवार, कहा- झूठ फैला रहे प्रधानमंत्री
पश्चिम बंगाल के सिंगूर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली के बाद राज्य की राजनीति में तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। तृणमूल कांग्रेस ने प्रधानमंत्री पर झूठ फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा है कि घुसपैठ को लेकर जो दावे किए जा रहे हैं, उनका ज़मीनी हकीकत से कोई मेल नहीं है। टीएमसी का कहना है कि केंद्र सरकार चुनावी माहौल में डर और भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रही है। टीएमसी ने चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया का हवाला दिया। इस जांच के दौरान करीब 58 लाख वोटरों के नाम मतदाता सूची से हटाए ग