दूतावास के अनुसार, 14 दिसंबर को बंदर अब्बास स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने ईरान सरकार को पत्र लिखकर क्रू से मिलने की अनुमति मांगी थी। इसके बाद से यह मांग कई बार दोहराई गई। इसके लिए राजनयिक पत्राचार किया गया और बंदर अब्बास व तेहरान में बैठकों का आयोजन हुआ। इन बैठकों में राजदूत स्तर की बातचीत भी शामिल रही।दूतावास ने कहा कि यह मामला ईरान की न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही, काउंसलर एक्सेस जल्दी देने और कानूनी प्रक्रिया में तेजी लाने पर जोर दिया जा रहा है। दूतावास ने कहा कि ईरानी अधिकारियों से क्रू को भारत में अपने परिवारों से बात करने की अनुमति देने का भी अनुरोध किया गया था।बंदर अब्बास स्थित वाणिज्य दूतावास ने 15 दिसंबर को संयुक्त अरब अमीरात की उस कंपनी से संपर्क किया, जो जहाज की मालिक है। दूतावास कंपनी के ईरान स्थित एजेंटों के संपर्क में भी है ताकि जहाज को भोजन, पानी और ईंधन मिलता रहे और क्रू के लिए ईरानी अदालतों में कानूनी मदद की व्यवस्था हो सके।दूतावास ने बताया कि जब जहाज पर भोजन और पानी कम होने की सूचना मिली, तो जनवरी की शुरुआत में ईरानी नौसेना से मदद लेकर आपात आपूर्ति की व्यवस्था की गई। इसके अलावा, दुबई स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास भी जहाज मालिक कंपनी पर कानूनी सहायता और नियमित सप्लाई सुनिश्चित करने का दबाव बना रहा है।गौरतलब है कि ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने 8 दिसंबर 2025 को यूएई के दिब्बा पोर्ट के पास जहाज को रोका। ईरानी अधिकारियों ने जहाज पर 6,000 मीट्रिक टन ईंधन की तस्करी का आरोप लगाया है। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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