पटना साहिब के सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आज भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि जिस तरह से पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा बर्बरतापूर्वक ईडी के अधिकारियों को जांच के क्रम में रोकने की कोशिश की गई, उसकी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने जो टिप्पणी की है, उससे गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने इस घटना की भर्त्सना करते हुए कहा कि कोर्ट में सरकार की ओर से बताया गया कि आईपैक कंपनी के पास कोयला घोटाले के मनी लॉन्ड्रिंग के 20 करोड़ रुपये जमा करने का संदेहास्पद सबूत मिले थे, इस कारण जांच जरूरी थी। यह घोटाला करीब तीन हजार करोड़ रुपये का है। उन्होंने कहा कि इस सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में ईडी ने स्पष्ट रूप से बताया है कि वहाँ हम क्यों गए थे? जांच के क्रम में वहाँ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहुंच गईं और एक फाइल लेकर निकल गईं। वहाँ पुलिस के बड़े अधिकारी भी पहुंचे और फाइल लेकर भागते नजर आए, यह हास्यास्पद दृश्य सभी ने देखा। वहाँ डीजीपी भी साथ थे।उन्होंने यह भी कहा कि उच्च न्यायालय में सुनवाई रोकने के लिए टीएमसी के लीगल सेल द्वारा यह सूचना दी गई कि सभी लोग आ जाओ। यह बात भी सुप्रीम कोर्ट को बताई गई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि ईडी की यह छापेमारी ममता बनर्जी के आवास, दफ्तर, टीएमसी के कार्यालय या किसी नेता के घर पर नहीं हो रही थी, यह छापेमारी आईपैक कंपनी के कार्यालय में हो रही थी। आजाद भारत के इतिहास में पहली बार हुआ कि एक मुख्यमंत्री भागते हुए पहुंची और भ्रष्टाचार की जांच कर रही एजेंसी से फाइल छीन ले।चारा घोटाला की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय कभी भी पटना के सीबीआई के दफ्तर पर हमला नह …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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