लगभग दो साल तक चले कूटनीतिक तनाव के बाद भारत और कनाडा के रिश्तों में सुधार के साफ संकेत दिखने लगे हैं। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के भारत दौरे की तैयारी इसी बदले हुए माहौल की सबसे बड़ी मिसाल मानी जा रही है। यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब अमेरिका की सख्त टैरिफ नीति ने वैश्विक व्यापार को झकझोर दिया है और दोनों देश नए साझेदारों की तलाश में हैं। व्यापार और निवेश… सीईपीए के जरिए व्यापार बढ़ाने और शुल्क बाधाएं कम करने पर जोर। सीईपीए के जरिए व्यापार बढ़ाने और शुल्क बाधाएं कम करने पर जोर। रक्षा और तकनीक… उभरती तकनीकों, साइबर सुरक्षा और रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई देने की योजना। उभरती तकनीकों, साइबर सुरक्षा और रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई देने की योजना। ऊर्जा और सप्लाई चेन… स्वच्छ ऊर्जा, खनिज और सप्लाई चेन में साझेदारी मजबूत करना। स्वच्छ ऊर्जा, खनिज और सप्लाई चेन में साझेदारी मजबूत करना। राजनयिक रिश्ते… दोबारा भरोसा कायम करने के लिए राजनयिक स्टाफ की संख्या बढ़ाना। दोबारा भरोसा कायम करने के लिए राजनयिक स्टाफ की संख्या बढ़ाना। लोगों के बीच संपर्क… वीजा, शिक्षा और कौशल हस्तांतरण जैसे क्षेत्रों में सहयोग। कनाडाई प्रधानमंत्री का प्रस्तावित भारत दौरा केवल एक औपचारिक कूटनीतिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि इसे द्विपक्षीय रिश्तों के रीसेट बटन के तौर पर देखा जा रहा है। बीते करीब दो वर्षों से दोनों देशों के संबंध ठंडे पड़े थे। अब कार्नी की यात्रा से व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग को नई दिशा देने की कोशिश होगी। इस दौरे का एक बड़ा मकसद भारत-कनाडा के बीच व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते यानी सीईपीए पर बातचीत को दोबारा शुरू करना है, ताकि 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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