1990: बीएमसी का चुनाव लड़ने की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष कर दिया गया। इसके साथ ही कुल सीटों में से तीस प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित कर दी गईं। 1991: एकल सदस्य निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या 221 निर्धारित की गई थी। वहीं, वडाला स्थित एकवर्थ कुष्ठ रोग अस्पताल को बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने अधीन ले लिया गया। 1994: महिलाओं (अनुसूचित जाति/जनजाति आदि सहित) के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित की गईं। वहीं, कुल सीटों में से 27 प्रतिशत सीटें पिछड़े वर्ग के सदस्यों के लिए आरक्षित हुईं। 1996: महापौर के पद में पिछड़े वर्ग के नागरिकों के लिए आरक्षण के प्रावधान के तहत, पहली बार महापौर की नियुक्ति की गई। इसके साथ ही महाराष्ट्र अधिनियम संख्या 25, 1996 के अनुसार, ‘बॉम्बे’ के स्थान पर ‘मुंबई’ नाम को पुनर्स्थापित किया गया। 1999: 1999 में महापौर-परिषद को समाप्त कर दिया गया। महाराष्ट्र अधिनियम 27वीं, 1999 के तहत नगर निगम की पुरानी व्यवस्था को पुनर्जीवित किया गया। इसके साथ ही उप महापौर और विपक्ष के नेता के पद की शुरुआत की गई। इसके साथ ही महापौर को कुछ शक्तियां प्रदान की गईं। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
BMC कितनी पुरानी?: छोटे अपराधों की सुनवाई के लिए 218 साल पहले बनी, कभी सिर्फ टैक्स देने वाले ही देते थे वोट
1990: बीएमसी का चुनाव लड़ने की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष कर दिया गया। इसके साथ ही कुल सीटों में से तीस प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित कर दी गईं। 1991: एकल सदस्य निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या 221 निर्धारित की गई थी। वहीं, वडाला स्थित एकवर्थ कुष्ठ रोग अस्पताल को बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने अधीन ले लिया गया। 1994: महिलाओं (अनुसूचित जाति/जनजाति आदि सहित) के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित की गईं। वहीं, कुल सीटों में से 27 प्रतिशत सीटें पिछड़े वर्ग के सदस्यों के लिए आरक्षित हुईं। 1996: महापौर के पद में पिछ