अमेरिका को सैकड़ों अरब डॉलर की सीधी टैरिफ राशि लौटानी पड़ सकती है। कंपनियां अपने निवेश का मुआवजा मांग सकती हैं। फैक्ट्रियों, प्लांट और उपकरणों पर हुए निवेश का पे-बैक करना पड़ सकता है। कुल नुकसान ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। भुगतान कब, किसे और कैसे होगा, यह तय करना भी बेहद मुश्किल होगा। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अगर किसी भी वजह से अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट टैरिफ के खिलाफ फैसला देता है, तो अमेरिका को भारी भरकम रकम चुकानी पड़ेगी। इसमें सिर्फ टैरिफ की वापसी ही नहीं, बल्कि उन देशों और कंपनियों को भी भुगतान करना होगा, जिन्होंने टैरिफ से बचने के लिए अमेरिका में फैक्ट्रियां, प्लांट और मशीनें लगाने में निवेश किया है। ट्रंप का कहना है कि इन सभी रकमों को जोड़ा जाए तो आंकड़ा ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।ट्रंप ने टैरिफ को राष्ट्रीय सुरक्षा का बोनस बताया है। उनके अनुसार, टैरिफ की वजह से अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ी है और कंपनियों ने देश के भीतर निवेश किया है। अगर अदालत ने इसे अवैध ठहराया, तो न केवल निवेशकों का भरोसा टूटेगा, बल्कि भविष्य की योजनाएं भी ठप हो जाएंगी। ट्रंप ने कहा कि जो लोग यह कहते हैं कि इस नुकसान की भरपाई आसानी से हो सकती है, वे या तो गलत जानकारी दे रहे हैं या इस जटिल मुद्दे को समझ नहीं पा रहे हैं।ट्रंप ने कहा कि इतनी बड़ी रकम चुकाना अमेरिका के लिए लगभग असंभव होगा। उनके मुताबिक, अगर कभी ऐसा हुआ भी तो इसमें कई साल लग जाएंगे यह तय करने में कि कुल राशि कितनी है और किसे कितना भुगतान करना है। उन्होंने कहा कि जब अमेरिका मजबूती से आगे बढ़ता है, तो पूरी दुनिया को फायदा होता है, लेकिन अगर अमेरिका कमजोर पड़ा तो वैश्विक अर्थव्यवस्था भी प्रभावित होगी।टैरिफ को …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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