अन्वेषा को धरती से करीब 600 किलोमीटर ऊपर पोलर सन-सिंक्रोनस पोलर आर्बिट में स्थापित किया जाएगा। इससे आतंकियों से लेकर घुसपैठियों के साथ उपद्रवी पर आसानी से पैनी नजर रख जा सकेगी। यह जंगलों या बंकरों में छिपे दुश्मनों की तस्वीरें भी खींच सकता है। इससे सेना को बहुत मदद मिलेगी और देश के दुश्मनों पर निगरानी की जा सकेगी। उपग्रह अन्वेषा पृथ्वी की कक्षा में घूमते हुए तस्वीरें लेगा। इसमें हाइपरस्पेक्ट्रल सेंसर लगे हैं, जो साधारण कैमरों से ज्यादा स्मार्ट हैं। यह आसमान से दुश्मन की हर हरकत पर नजर रख सकता है। इसे डीआरडीओ ने विकसित किया है। इस लॉन्च में दो सॉलिड स्ट्रैप-ऑन मोटर वाले पीएसएलवी-डीएल वेरिएंट का इस्तेमाल किया जाएगा। यह मिशन पीएसएलवी रॉकेट की 64वीं उड़ान है।पीएसएलवी, इसरो का मुख्य लॉन्च व्हीकल है, जिसने चंद्रयान-1, मार्स ऑर्बिटर मिशन, आदित्य-L1 और एस्ट्रोसैट मिशन जैसे महत्वपूर्ण मिशन सहित 63 उड़ानें पूरी की है। 2017 में, पीएसएलवी ने एक ही मिशन में 104 सैटेलाइट लॉन्च करके विश्व रिकॉर्ड बनाया था।PSLV-C62 मिशन एक बहुत ही अहम अंतरिक्ष मिशन है। यह सिर्फ एक नियमित प्रक्षेपण नहीं है। 16 उपग्रहों को सन-सिंक्रोनस पोलर ऑर्बिट में स्थापित करने वाला यह मिशन वैश्विक स्मॉल-सैटेलाइट लॉन्च बाजार में भारत की बढ़ती पकड़ को दिखाता है। मिशन का प्रमुख उपग्रह EOS-N1, जिसे ‘अन्वेषा’ नाम दिया गया है। यह रक्षा अनुसंधान व विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित एक उन्नत अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट है।मिशन का प्रमुख उपग्रह EOS-N1, जिसे ‘अन्वेषा’ नाम दिया गया है। यह रक्षा अनुसंधान व विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित एक उन्नत अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट है। इसमें हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग तकनी …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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