ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन अब दो हफ्तों के करीब पहुंच चुके हैं और हालात लगातार सख्त होते जा रहे हैं। इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद हैं, सुरक्षा बलों की कार्रवाई तेज है और सरकार ने खुले तौर पर कड़ा संदेश दे दिया है। इसके बावजूद राजधानी तेहरान समेत कई शहरों में लोग सड़कों पर उतर रहे हैं। बढ़ती मौतों और गिरफ्तारियों के बीच सवाल यह है कि क्या यह आंदोलन दबेगा या और उग्र होगा। सरकार ने देश को बाहरी दुनिया से लगभग काट दिया है। गुरुवार से इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय फोन सेवाएं बंद हैं। विदेशी मीडिया की मौजूदगी न के बराबर है। सरकारी और अर्ध-सरकारी मीडिया ही सीमित जानकारी बाहर भेज पा रहे हैं। ईरान में यह विरोध दिसंबर के अंत में शुरू हुआ। शुरुआत आर्थिक संकट से हुई, लेकिन अब यह सीधे सत्ता को चुनौती दे रहा है। ईरानी रियाल की कीमत ऐतिहासिक गिरावट के साथ एक डॉलर के मुकाबले 14 लाख तक पहुंच गई। महंगाई, बेरोजगारी और प्रतिबंधों से त्रस्त लोग सड़कों पर उतरे। धीरे-धीरे नारों का रुख आर्थिक मांगों से हटकर राजनीतिक बदलाव की ओर हो गया। सरकार मान रही है कि प्रदर्शन जारी हैं, लेकिन उसे विदेशी साजिश बताकर कार्रवाई को सही ठहरा रही है।ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के संकेतों के बाद सरकार ने खुली चेतावनी दी है। अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मोवाहेदी आजाद ने प्रदर्शनकारियों को खुदा का दुश्मन बताया। इस आरोप में मौत की सजा तक का प्रावधान है। सरकारी टीवी पर कहा गया कि कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।अभियोजकों को तेजी से आरोप पत्र दाखिल करने के आदेश दिए गए हैं। यह संदेश बताता है कि सरकार किसी भी कीमत पर नियंत्रण बनाए रखना चाहती है। इसके बावजूद सत्यापित वीडियो सामने आए हैं। उत्तरी तेहरान …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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