आज का शब्द: करुण और बालकवि बैरागी की कविता- झर गये पात ‘हिंदी हैं हम’ शब्द शृंखला में आज का शब्द है- करुणा। प्रस्तुत है बालकवि बैरागी की कविता- झर गये पात झर गये पात बिसर गई टहनी करुण कथा जग से क्या कहनी ? नव कोंपल के आते-आते टूट गये सब के सब नाते राम करे इस नव पल्लव को पड़े नहीं यह पीड़ा सहनी झर गये पात बिसर गई टहनी करुण कथा जग से क्या कहनी ? कहीं रंग है, कहीं राग है कहीं चंग है, कहीं फ़ाग है और धूसरित पात नाथ को टुक-टुक देखे शाख विरहनी झर गये पात बिसर गई टहनी करुण कथा जग से क्या कहनी ? पवन पाश में पड़े पात ये जनम-मरण में रहे साथ ये “वृन्दावन” की श्लथ बाहों में समा गई ऋतु की “मृगनयनी” झर गये पात बिसर गई टहनी करुण कथा जग से क्या कहनी ? हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें। 5 hours ago …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
आज का शब्द: करुण और बालकवि बैरागी की कविता- झर गये पात
आज का शब्द: करुण और बालकवि बैरागी की कविता- झर गये पात 'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- करुणा। प्रस्तुत है बालकवि बैरागी की कविता- झर गये पात झर गये पात बिसर गई टहनी करुण कथा जग से क्या कहनी ? नव कोंपल के आते-आते टूट गये सब के सब नाते राम करे इस नव पल्लव को पड़े नहीं यह पीड़ा सहनी झर गये पात बिसर गई टहनी करुण कथा जग से क्या कहनी ? कहीं रंग है, कहीं राग है कहीं चंग है, कहीं फ़ाग है और धूसरित पात नाथ को टुक-टुक देखे शाख विरहनी झर गये पात बिसर गई टहनी करुण कथा जग से क्या कहनी ? पवन पाश