अपने तीन पन्नों के पत्र में ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर राजनीतिक भेदभाव और मनमानी करने का आरोप लगाया। उन्होंने लिखा कि सुनवाई की प्रक्रिया पूरी तरह मशीनी हो गई है। यह सिर्फ तकनीकी आंकड़ों पर चल रही है और इसमें मानवीय समझ या संवेदनशीलता की भारी कमी है। उन्होंने साफ कहा कि इसका मकसद सुधार करना नहीं, बल्कि लोगों को हटाना है।मुख्यमंत्री ने कहा कि नाम की स्पेलिंग या उम्र में छोटी-मोटी गलतियों की वजह से आम लोगों को परेशान किया जा रहा है। उन्हें जबरदस्ती सुनवाई के लिए बुलाया जाता है, जिससे उनका उत्पीड़न होता है और उनकी मजदूरी का भी नुकसान होता है।ममता ने शादीशुदा महिलाओं की परेशानी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि शादी के बाद सरनेम बदलने वाली महिलाओं को अपनी पहचान साबित करने के लिए बुलाया जा रहा है, जो उनका गंभीर अपमान है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ खास चुनाव क्षेत्रों को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है और बंगाल के लिए अलग पोर्टल का इस्तेमाल होने से अधिकारियों में भ्रम है। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
CM ममता ने CEC को लिखा पत्र: कहा- SIR से लोकतांत्रिक ढांचे पर चोट, मामूली गलतियों पर परेशान किए जा रहे मतदाता
अपने तीन पन्नों के पत्र में ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर राजनीतिक भेदभाव और मनमानी करने का आरोप लगाया। उन्होंने लिखा कि सुनवाई की प्रक्रिया पूरी तरह मशीनी हो गई है। यह सिर्फ तकनीकी आंकड़ों पर चल रही है और इसमें मानवीय समझ या संवेदनशीलता की भारी कमी है। उन्होंने साफ कहा कि इसका मकसद सुधार करना नहीं, बल्कि लोगों को हटाना है।मुख्यमंत्री ने कहा कि नाम की स्पेलिंग या उम्र में छोटी-मोटी गलतियों की वजह से आम लोगों को परेशान किया जा रहा है। उन्हें जबरदस्ती सुनवाई के लिए बुलाया जाता है, जिससे उनका उत्पीड