प्रियांक खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक अखबार का लेख साझा किया, जिसमें बताया गया था कि एक आरएसएस सदस्य की ओर से दायर मानहानि की शिकायत के मामले में एक विशेष अदालत ने उन्हें और राज्य के साथी मंत्री दिनेश गुंडू राव को नोटिस जारी किया है।अपने पोस्ट में खरगे ने आरएसएस प्रमुख मोहन भगवत के उस बयान का हवाला दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि संगठन अपने स्वयंसेवकों के चंदे से चलता है। इस दावे पर सवाल उठाते हुए उन्होंने स्पष्टीकरण मांगा।उन्होंने कहा, ‘कुछ चुनिंदा लोगों का समूह अपने कठपुतलियों का इस्तेमाल करके हमारे खिलाफ मामले दर्ज करवा रहा है, सिर्फ इसलिए कि हम आरएसएस पर जायज सवाल उठा रहे हैं। आरएसएस राष्ट्र के विकास में सबसे बड़ी बाधा है।’ उन्होंने सवाल खड़े करते हुए कहा, ‘मोहन भागवत ने कहा है कि आरएसएस अपने स्वयंसेवकों के दिए गए दान से चलता है। हालांकि, इस दावे के संबंध में कई जायज सवाल उठते हैं: ये स्वयंसेवक कौन हैं और इनकी पहचान कैसे होती है? दिए गए दान का पैमाना और स्वरूप क्या है? ये दान किन तरीकों या माध्यमों से प्राप्त होते हैं?‘उन्होंने आगे सवाल किया, ‘अगर आरएसएस पारदर्शी तरीके से काम करता है, तो दान सीधे संगठन को उसकी अपनी पंजीकृत पहचान के तहत क्यों नहीं दिया जाता? पंजीकृत संस्था न होते हुए भी आरएसएस अपनी वित्तीय और संगठनात्मक संरचना को कैसे बनाए रखता है? पूर्णकालिक प्रचारकों को वेतन कौन देता है और संगठन के नियमित परिचालन खर्चों को कौन पूरा करता है? बड़े पैमाने पर आयोजित कार्यक्रमों, अभियानों और जनसंपर्क गतिविधियों का वित्तपोषण कैसे होता है?‘कांग्रेस नेता ने यह भी पूछा, ‘जब स्वयंसेवक स्थानीय कार्यालयों से वर्दी या अन्य सामग्री खरीदते हैं, तो इन निध …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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