Interview: सीमा पर बेटियों की तैनाती पर होना चाहिए पुनर्विचार, परमवीर चक्र विजेता कैप्टन बाना सिंह से खास बात विस्तार Follow Us और पढ़ें यह वीडियो/ हटाएं सोमवार को सेना के एक कार्यक्रम के लिए उधमपुर जाना था तो भोर में चार बजे ही उठ गए। कहते हैं कि सेना का आदेश आज भी उनके लिए उतना ही महत्व रखता है जितना सेवा के दिनों में था। करीब 150 किलोमीटर की यात्रा कर लौटें हैं लेकिन चेहरे पर चमक कायम है। उनका जोश और जज्बा अब भी सेना के दिनों जैसा है। वह न सिर्फ भारत-पाकिस्तान बल्कि दुनिया की हर महत्वपूर्ण घटना पर नजर रख रहे हैं। प्रस्तुत हैं बाना सिंह से बातचीत के प्रमुख अंश। बहन-बेटियों को सेना में मौका मिले, खतरा नहीं बाना सिंह कहते हैं कि मैंने पिछले दिनों देखा कि बेटियां बॉर्डर पर गश्त कर रही हैं। यह मुझे अच्छा नहीं लगा। वह कहते हैं कि बेटियों को सेना में भरपूर अवसर दिया जाए। बहुत सारे स्थान हैं जहां उन्हें तैनाती दी जा सकती है। यह उचित नहीं है कि मां बॉर्डर पर काम करे और बेटा चारपाई पर सोए। बॉर्डर बहुत संवेदनशील होता है। इसे जिम्मेदार लोगों को समझना चाहिए। सोमवार को सेना के एक कार्यक्रम के लिए उधमपुर जाना था तो भोर में चार बजे ही उठ गए। कहते हैं कि सेना का आदेश आज भी उनके लिए उतना ही महत्व रखता है जितना सेवा के दिनों में था।करीब 150 किल …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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