महमूद गजनवी लूटकर चला गया, लेकिन सोमनाथ के प्रति हमारी भावना को हमसे छीन नहीं सका। सोमनाथ से जुड़ी आस्था, विश्वास और प्रबल हुआ। उसकी आत्मा लाखों श्रद्धालुओं के भीतर सांस लेती रही। सोमनाथ दुनिया को संदेश दे रहा है कि मिटाने वाली मानसिकता खत्म जो जाती है। सोमनाथ हमारी प्रेरणा का स्रोत है, शक्ति का पुंज है। हमारा सौभाग्य है कि हमने उस धरती पर जीवन पाया है, जिसने देवी अहिल्याबाई होलकर जैसी विभूति को जन्म दिया। उन्होंने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि श्रद्धालु सोमनाथ में पूजा कर सकें। सोमनाथ पर आक्रमण, लोगों के साथ क्रूरता और विध्वंस के बारे में पढ़कर हृदय कांप उठता है। इस दुःख की पीड़ा आज भी महसूस होती है। शास्त्रों में कहा गया है…अर्थात्, सोमनाथ शिवलिंग के दर्शन से व्यक्ति सभी पापों से मुक्त हो जाता है। मन में जो भी पुण्य कामनाएं होती हैं, वह पूरी होती हैं और मृत्यु के बाद आत्मा स्वर्ग को प्राप्त होती है।दुर्भाग्यवश, यही सोमनाथ, जो करोड़ों लोगों की श्रद्धा और प्रार्थनाओं का केंद्र था, विदेशी आक्रमणकारियों का निशाना बना, जिनका उद्देश्य विध्वंस था। वर्ष 2026 सोमनाथ मंदिर के लिए बहुत महत्व रखता है, क्योंकि इस महान तीर्थ पर हुए पहले आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे हो रहे हैं। जनवरी 1026 में गजनवी के महमूद ने आस्था और सभ्यता के महान प्रतीक को नष्ट करने के उद्देश्य से इस मंदिर को ध्वस्त कर दिया था। यह हिंसक और बर्बर प्रयास था।सोमनाथ हमला इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में शामिल है। मगर, हजार वर्ष बाद आज भी यह मंदिर पूरे गौरव के साथ खड़ा है। समय-समय पर इस मंदिर को उसके पूरे वैभव के साथ पुन:निर्मित करने के प्रयास जारी रहे। मंदिर का वर्तमान स्वरूप 1951 में आकार ले …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
सोमनाथ: हमारी अटूट आस्था और स्वाभिमान के एक हजार साल की गाथा
महमूद गजनवी लूटकर चला गया, लेकिन सोमनाथ के प्रति हमारी भावना को हमसे छीन नहीं सका। सोमनाथ से जुड़ी आस्था, विश्वास और प्रबल हुआ। उसकी आत्मा लाखों श्रद्धालुओं के भीतर सांस लेती रही। सोमनाथ दुनिया को संदेश दे रहा है कि मिटाने वाली मानसिकता खत्म जो जाती है। सोमनाथ हमारी प्रेरणा का स्रोत है, शक्ति का पुंज है। हमारा सौभाग्य है कि हमने उस धरती पर जीवन पाया है, जिसने देवी अहिल्याबाई होलकर जैसी विभूति को जन्म दिया। उन्होंने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि श्रद्धालु सोमनाथ में पूजा कर सकें। सोमनाथ पर