केस स्टडी एकः पढ़ाई के साथ बढ़ता स्क्रीन टाइम, बदलता व्यवहार पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद के रहने वाले व जाफराबाद में ही स्थित एक प्राइवेट स्कूल में 7वीं कक्षा के छात्र के माता-पिता पहले अपने बेटे को पढ़ाई में ठीक और स्वभाव से शांत बताते थे। ऑनलाइन क्लास शुरू होने के बाद धीरे-धीरे बच्चे का स्क्रीन टाइम बढ़ता गया। पढ़ाई के अलावा वह मोबाइल पर वीडियो गेम खेलने लगा। कुछ महीनों बाद माता-पिता ने नोटिस किया कि बच्चा छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ा हो जाता है, बात काटने लगा है और रात में देर से सोता है। स्कूल से शिकायत आने लगी कि बच्चा क्लास में ध्यान नहीं देता और जल्दी थक जाता है। जांच में कोई शारीरिक समस्या नहीं पाई गई। काउंसलिंग के दौरान यह साफ हुआ कि बच्चा दिन में कई घंटे स्क्रीन पर बिताता है और उसका नींद और जागने का संतुलन बिगड़ चुका है। परिवार को स्क्रीन टाइम सीमित करने, सोने से पहले मोबाइल पूरी तरह बंद रखने और रोज बाहर खेलने की सलाह दी गई। करीब एक महीने में बच्चे की नींद, ध्यान और व्यवहार में स्पष्ट सुधार देखा गया। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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