1 of 10 magh mela 2026 prayagraj - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स संगम की रेती पर बने तंबुओं में गृहस्थ और साधु-संत कल्पवास करते हैं। कल्पवास में लोगों की दिनचर्या नियमित और संयमित होती है। अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के संरक्षक स्वामी महेशाश्रम महाराज के मुताबिक पौष पूर्णिमा पर जो श्रद्धालु कल्पवास के लिए आते हैं, उन्हें सबसे पहले संगम तट पहुंचने पर गणेश पूजन करना चाहिए। प्रयागराज में संगम की रेती पर शनिवार को पौष पूर्णिमा के पहले स्नान पर्व के साथ ही माघ मेला ही नहीं कल्पवास भी शुरू हो गया। ऐसी मान्यता है कि माघ मास में सभी देवी-देवता प्रयागराज में ही वास करते हैं, इसलिए यहां पौष पूर्णिमा से कल्पवास की शुरुआत होती है। प्रयागराज में कल्पवास करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। यह वीडियो/ हटाएं 2 of 10 माघ मेला क्षेत्र स्थित खाक चौक में स्नान ध्यान के बाद धुनी के सामने बैठे साधु - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी इसके बाद गंगा पूजन और रेत से पिंडी बनाकर सभी देवी-देवताओं का पूजन करना चाहिए। इसके बाद श्रद्धालु अपने शिविर में पहुंचते हैं। जहां शिविर के बाहर तुलसी और कदली का पौधा रोपने का विधान है। 3 of 10 पौष पूर्णिमा स्नान पर्व को लेकर मेला क्षेत्र में जाते कल्पवासी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी स्वामी बताते है कि प्रयाग, माघ और कल्पवास तीनों एक-दूसरे के पूरक हैं। इसका पौराणिक और शास्त्र वर्णित है कि श्रद्धालु पौष पूर्णिमा पर गंगा स्नान कर कल्पवास का संकल्प लेकर एक माह का कठिन तप और व्रत की शुरुआत करते हैं। इस दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं। 4 of 10 Magh Mela 2026 - फोटो : अमर उजाला तीन पहर गंगा स्नान और भूमि पर शयन करते …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
तंबुओं की नगरी फिर गुलजार: आस्था का वास... कल्पवासियों का डेरा; संगम की रेती पर कल्पवास करने का अक्षय पुण्य
1 of 10 magh mela 2026 prayagraj - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स संगम की रेती पर बने तंबुओं में गृहस्थ और साधु-संत कल्पवास करते हैं। कल्पवास में लोगों की दिनचर्या नियमित और संयमित होती है। अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के संरक्षक स्वामी महेशाश्रम महाराज के मुताबिक पौष पूर्णिमा पर जो श्रद्धालु कल्पवास के लिए आते हैं, उन्हें सबसे पहले संगम तट पहुंचने पर गणेश पूजन करना चाहिए। प्रयागराज में संगम की रेती पर शनिवार को पौष पूर्णिमा के पहले स्नान पर्व के साथ ही माघ मेला ही नहीं कल्पवास भी शुरू हो गया। ऐस