3 जनवरी 2026 को अमेरिका की ओर से वेनेजुएला पर हमला और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को बंधक बनाने की घटना के बाद पूरी दुनिया की निगाहें सोमवार को सुबह खुलने वाले वैश्विक और भारतीय बाजारों पर टिकी हैं। शनिवार की सुबह जब कराकस में अमेरिकी हवाई हमले हुए, तब तक वैश्विक बाजार सप्ताहांत के लिए बंद हो चुके थे, लेकिन ‘ग्रे मार्केट’ और सेंटिमेंट ने खतरे की घंटी बजा दी है। अनिश्चितता के इस माहौल में सोना $4,400 प्रति औंस के ऐतिहासिक स्तर को पार कर चुका है, जबकि डॉलर की ‘सेफ हेवन’ मांग के चलते रुपया 90 के मनोवैज्ञानिक स्तर पर लड़खड़ा रहा है। 3 जनवरी 2026 की रात क्या हुआ? इस घटना ने न केवल लैटिन अमेरिका में शक्ति संतुलन को बदल दिया है, बल्कि वैश्विक कमोडिटी बाजार, सोने की कीमतों और भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए भी खतरे की घंटी बजा दी है। दलाल स्ट्रीट से लेकर कमोडिटी डेस्क तक, हर निवेशक के मन में बस एक ही सवाल है- क्या वेनेजुएला का यह संकट तेल और शेयर बाजार में केवल एक अल्पकालिक झटका साबित होगा, या यह 2026 का पहला वैश्विक तनाव भारतीय अर्थव्यवस्था को लंबे समय तक परेशान करेगा? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पुष्टि की कि अमेरिकी विशेष बलों ने एक “बड़े पैमाने पर हमले” को अंजाम दिया है। मुख्य रूप से कराकस स्थित मुख्य सैन्य बेस ‘फुएर्ते तिउना’, ला कार्लोटा एयरबेस और ला गुएरा बंदरगाह को निशाना बनाया गया। मादुरो के बाद वेनेजुएला में क्या चल रहा? अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन पर ‘नार्को-टेररिज्म’ के आरोप हैं और अमेरिका ने उन पर $50 मिलियन का इनाम रखा था। मादुरो के हटाए ज …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
सोमवार को बाजार में क्या होगा: सोने में तेजी, रुपया कमजोर, अमेरिका-वेनेजुएला विवाद आखिर कितना असर डालेगा?
3 जनवरी 2026 को अमेरिका की ओर से वेनेजुएला पर हमला और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को बंधक बनाने की घटना के बाद पूरी दुनिया की निगाहें सोमवार को सुबह खुलने वाले वैश्विक और भारतीय बाजारों पर टिकी हैं। शनिवार की सुबह जब कराकस में अमेरिकी हवाई हमले हुए, तब तक वैश्विक बाजार सप्ताहांत के लिए बंद हो चुके थे, लेकिन 'ग्रे मार्केट' और सेंटिमेंट ने खतरे की घंटी बजा दी है। अनिश्चितता के इस माहौल में सोना $4,400 प्रति औंस के ऐतिहासिक स्तर को पार कर चुका है, जबकि डॉलर की 'सेफ हेवन' मांग के चलते रुपया 90 के मनोवै