पश्चिम बंगाल के लिए ये चुनावी साल है। चुनाव तारीखों के एलान से पहले राज्य में सियासी पारा चढ़ा हुआ है। देश के गृह मंत्री और भाजपा नेता अमित शाह लगातार बंगाल के दौरे कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी दौरे जारी हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी मैदान में उतर चुकी हैं। बंगाल में चल रही इसी सियासी हलचल पर इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, अनुराग वर्मा, अजय सेतिया, बिलाल सब्जवारी, पीयूष पंत और राजनीतिक विश्लेषक संजय राणा मौजूद रहे। अनुराग वर्मा: भाजपा पिछले विधानसभा चुनावों में भी बहुत दमखम से लड़ी थी और तीन सीट से बढ़कर 77 सीटों तक आ गई। अब जो चुनाव का नया पैटर्न आया है कि आप रेवड़ी क्या बांटने जा रहे हो? तो ये एक सबसे बड़ा डिसाइडिंग फैक्टर होगा। दूसरी बड़ी चीज है घुसपैठ और पोलराइजेशन। बीजेपी लोगों को यह समझाने की कोशिश कर रही है कि घुसपैठ देश और पश्चिम बंगाल दोनों के लिए खतरनाक है। मुझे लगता है कि भाजपा की तैयारी सही ट्रैक पर जाते दिख रही है, लेकिन ममता बनर्जी लंबे समय से सरकार में हैं। उनको अपना किला बचाना है। अजय सेतिया: भारतीय जनता पार्टी की रणनीति हमेशा यह होती है कि वे बहुत पहले शुरू होते हैं और अंत तक हमलावर रहते हैं। बंगाल में भी अमित शाह ने माइक्रो मैनेजमेंट शुरू कर दिया है। इस बार ध्रुवीकरण कुछ ज्यादा होता हुआ दिखाई दे रहा है, लेकिन हमें ट्रेंड भी देखना पड़ेगा। लोकसभा चुनाव में ममता ने अपना रुतबा बरकरार ही नहीं रखा बल्कि उसे बढ़ाया भी है। उन्होंने सीटें बढ़ाईं, जबकि भाजपा की सीटें घटी हैं। जिस तरह से ममता बनर्जी खेल रही हैं, वह खुद ध्रुवीकरण की तरफ बढ़ रही हैं। अगर वहां पक्का ध्रुवीकरण हो …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

मूल लेख स्रोत पर पढ़ें