राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) से लेकर एनसीआर से सटे हरियाणा के यमुनानगर तक अवैध खनन अब कोई छिपी हुई गतिविधि नहीं रह गई है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में पेश अधिग्रहीत सैटेलाइट और ड्रोन तस्वीरें, कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (सीएजी) की ऑडिट रिपोर्टें और राज्य स्तरीय जांच दस्तावेज यह साबित करते हैं कि रेत, बजरी और पत्थर का अवैध दोहन वर्षों से संगठित नेटवर्क के तहत चल रहा है। सरकारें बदलीं, नीतियां बदलीं, आदेश जारी हुए लेकिन खनन माफिया हर दौर में आबाद रहा। यह कहानी केवल अवैध खनन की नहीं बल्कि नेता- अधिकारी- माफिया गठजोड़, संस्थागत विफलता और उस व्यवस्था की है, जहां कानून से पहले पैसा चलता है। सीएजी की हरियाणा और उत्तर प्रदेश से जुड़ी ऑडिट रिपोर्टों में बार-बार दर्ज है कि अवैध खनन कोई एक-दो साल की समस्या नहीं, बल्कि दशकों से चलती आ रही एक संरचनात्मक विफलता है।इन रिपोर्टों में यह भी उल्लेख है कि खनन पट्टों की शर्तों, पर्यावरणीय स्वीकृतियों और रॉयल्टी संग्रह में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आती रही हैं, लेकिन उन पर स्थायी और निर्णायक कार्रवाई नहीं हो सकी। एनजीटी ने अलग-अलग मामलों में स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यमुना नदी, अरावली और शिवालिक क्षेत्र में अवैध खनन चेतावनियों और प्रतिबंधों के बावजूद जारी रहा, जो यह दर्शाता है कि समस्या केवल नियमों की नहीं, बल्कि उन्हें लागू करने की इच्छाशक्ति की भी है।एनजीटी में दाखिल हलफनामों के साथ प्रस्तुत इसरो-आधारित सैटेलाइट इमेजरी और ड्रोन फुटेज में एनसीआर के कई हिस्सों में यमुना के खादर क्षेत्र की बदली हुई भौगोलिक संरचना साफ दिखाई देती है। इन तस्वीरों में नदी किनारे बने अवैध रैंप, भारी मशीनों के निशान और असामान्य गड् …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
Delhi: एनसीआर समेत हरियाणा के यमुनानगर में खनन माफिया का खुला खेल, एनजीटी में दाखिल रिपोर्ट में पुष्टि
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) से लेकर एनसीआर से सटे हरियाणा के यमुनानगर तक अवैध खनन अब कोई छिपी हुई गतिविधि नहीं रह गई है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में पेश अधिग्रहीत सैटेलाइट और ड्रोन तस्वीरें, कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (सीएजी) की ऑडिट रिपोर्टें और राज्य स्तरीय जांच दस्तावेज यह साबित करते हैं कि रेत, बजरी और पत्थर का अवैध दोहन वर्षों से संगठित नेटवर्क के तहत चल रहा है। सरकारें बदलीं, नीतियां बदलीं, आदेश जारी हुए लेकिन खनन माफिया हर दौर में आबाद रहा। यह कहानी केवल अवैध खनन की नहीं बल्कि