प्रधानमंत्री ने कहा कि सुधारों का मतलब प्रक्रियाओं से आगे बढ़कर समाधान तक पहुंचना है। उन्होंने जोर दिया कि प्रक्रियाएं सरल हों, जीवन और कारोबार में आसानी बढ़े और सिस्टम ज्यादा अनुकूल बने। क्रियान्वयन में समय, लागत और गुणवत्ता तीनों पर समान ध्यान जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रगति के जरिए परिणाम आधारित शासन को मजबूती मिली है और अब इसे और गहराई तक ले जाने की जरूरत है।प्रधानमंत्री ने प्रगति को पिछले दस वर्षों में भारत की शासन संस्कृति में आए गहरे परिवर्तन का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि जब फैसले समय पर होते हैं, समन्वय मजबूत होता है और जवाबदेही तय होती है, तो सरकारी कामकाज की रफ्तार अपने आप बढ़ती है और उसका सीधा असर नागरिकों के जीवन में दिखता है।प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रगति सिर्फ एक समीक्षा बैठक नहीं, बल्कि टीम इंडिया की भावना और सहकारी संघवाद का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने सड़क, रेल, बिजली, जल संसाधन और कोयला जैसे क्षेत्रों की पांच अहम बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की समीक्षा की, जो पांच राज्यों में फैली हैं और जिनकी कुल लागत 40,000 करोड़ रुपये से अधिक है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय महत्व की कई लंबित परियोजनाएं अब पूरी हो चुकी हैं।पीएम श्री योजना की समीक्षा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इसे समग्र और भविष्य के लिए तैयार स्कूली शिक्षा का राष्ट्रीय मानक बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि योजना का क्रियान्वयन ढांचागत नहीं, बल्कि परिणाम केंद्रित होना चाहिए। सभी मुख्य सचिवों से उन्होंने पीएम श्री योजना की कड़ी निगरानी करने और इन स्कूलों को राज्य सरकारों के अन्य स्कूलों के लिए बेंचमार्क बनाने को कहा। साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों को जमीनी दौरे कर मूल्यांकन करने की सलाह दी।प …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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