नया साल सियासी दलों खासकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) और विपक्षी इंडिया गठबंधन के लिए चुनौतियों का साल होगा। नए साल के पूर्वार्ध में केंद्रशासित प्रदेश पुदुचेरी और चार राज्यों केरल, तमिलनाडु, असम व पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणाम देश की सियासत की भावी दशा और दिशा तय करेंगे। केरल में वामदल, तमिलनाडु में डीएमके, पश्चिम बंगाल में टीएमसी, असम व पुदुचेरी में भाजपा की अगुवाई वाले राजग के सामने अपना गढ़ बचाने की चुनौती होगी। भाजपा के लिए विशेष रूप से नया साल चुनौतियों और अवसरों से भरपूर होगा। पार्टी के सामने दक्षिण भारत के केरल और तमिलनाडु में अपनी ताकत साबित करने का अवसर के साथ पश्चिम बंगाल में दशकों से कमल खिलाने की इच्छा को पूरा करने की चुनौती होगी। इसके अलावा असम में जीत की हैट्रिक लगाने और पुदुचेरी में राजग की अगुवाई वाली सरकार को बनाए रखने की भी चुनौती होगी।विपक्षी गठबंधन के सामने बड़ी चुनौती : वर्ष 2026 में विपक्षी गठबंधन के लिए चुनौती बड़ी है। दरअसल पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में असम, पश्चिम बंगाल और केरल में गठबंधन के घटक दल आमने-सामने होंगे। केरल में कांग्रेस की अगुवाई वाले यूडीएफ और वाम दलों की अगुवाई वाले एलडीएफ के बीच ही मुख्य मुकाबला होगा। इसके अलावा पश्चिम बंगाल में भी टीएमसी का वाम दलों और कांग्रेस के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन के आसार नहीं दिख रहे। पुदुचेरी और तमिलनाडु में विपक्षी गठबंधन की पुरानी एकता बरकरार रहेगी।चुनावी राज्यों में मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल पर सबकी नजरें रहेंगी। सत्तारूढ़ टीएमसी के सामने जीत का चौका लगाने की चुनौती होगी, तो मुख्य विपक्षी पार्टी के रूप में उभरी भाजपा के लिए सत्ता हासिल करने की चुनौती रहेगी। बीते चुनाव में भ …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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