भारत की कन्नड़ भाषा की लेखिका बानू मुश्ताक को साल 2025 में बुकर सम्मान दिया गया। उन्हें उनकी पुस्तक हार्ट लैंप के लिए सम्मानित किया गया। उनके साथ किताब का अंग्रेजी में अनुवाद करने वाली दीपा भष्ठी को भी बुकर से नवाजा गया।1948 को कर्नाटक में पैदा हुई बानू लेखिका होने के साथ वकील और सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं। अंग्रेजी के अलावा उनका काम उर्दू, हिंदी, तमिल और मलयालम में भी अनूदित हो चुका है। बहुत कम उम्र से ही लिखने वाली मुश्ताक पत्रकार भी रही हैं, लेकिन 29 साल की उम्र में उन्होंने अपने अनुभवों को पेशेवर तरीके से लिखना शुरु कर दिया था। उनकी कहानियां महिला जीवन की तमाम समस्याओं को इंगित करती हैं। कहानियों के अलावा उपन्यास, निबंध और कविता भी लिखे, इसके साथ उनकी किताब कारी नागरागालू पर 2003 में फिल्म हसीना भी बनी है।12 कहानियों का संग्रह हार्ट लैंप दक्षिण भारत की पितृसत्तात्मकता की व्यथा है। इन कहानियों के दीपा भष्ठी ने 2022 से अनूदित करना शुरु किया था। किताब में 1990 से लेकर 2023 तक की लिखी कहानियों का संग्रह है। कुल मिलाकर यह किताब 30 साल के अधिक समय में लिखी गई है। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
Year Ender 2025: सोफिया कुरैशी से मैथिली ठाकुर तक...2025 में देश की बेटियों ने बटोरी सुर्खियां
भारत की कन्नड़ भाषा की लेखिका बानू मुश्ताक को साल 2025 में बुकर सम्मान दिया गया। उन्हें उनकी पुस्तक हार्ट लैंप के लिए सम्मानित किया गया। उनके साथ किताब का अंग्रेजी में अनुवाद करने वाली दीपा भष्ठी को भी बुकर से नवाजा गया।1948 को कर्नाटक में पैदा हुई बानू लेखिका होने के साथ वकील और सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं। अंग्रेजी के अलावा उनका काम उर्दू, हिंदी, तमिल और मलयालम में भी अनूदित हो चुका है। बहुत कम उम्र से ही लिखने वाली मुश्ताक पत्रकार भी रही हैं, लेकिन 29 साल की उम्र में उन्होंने अपने अनुभवों को पे