स्नैक्स ने किस तरह हमारे खाने के तरीक़े को बदल दिया है?
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Author, द फ़ूड चेन पदनाम, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस
25 मिनट पहले
भुनी मूंगफली, चिप्स, मिठाइयाँ, चॉकलेट, चावल के क्रैकर्स, बॉम्बे मिक्स, कुकीज़, डोनट्स, केक , मीठे हों या नमकीन, दुनिया में कई तरह के स्नैक्स हैं.
हज़ारों सालों से इंसान स्नैक्स खाते आ रहे हैं, लेकिन आजकल तो ये एक बड़ा उद्योग बन गया है जिसकी सालाना कीमत लाखों करोड़ों से भी ज़्यादा है.
अब तो बहुत से लोग दिन में या रात में खाने के मुक़ाबले स्नैक्स से ही ज़्यादा कैलोरी ले लेते हैं.
लेकिन इस बड़ी इंडस्ट्री बनने के पीछे सिर्फ़ हमारी भूख या समय की कमी ही ज़िम्मेदार नहीं है. खाना बनाने वाली कंपनियों की चालाक मार्केटिंग ने भी हमारी डाइट में स्नैक्स को शामिल करने में अहम भूमिका निभाई है.
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सबसे पुराना स्नैक कौन सा है?
कैंब्रिज इंग्लिश डिक्शनरी के मुताबिक़, स्नैक मतलब “खाने के बीच में थोड़ा-सा खाना या बहुत छोटा मील”.
यानी स्नैक ज़रूरी नहीं कि जंक फ़ूड ही हो, या फिर पैकेट वाला तैयार कम पौष्टिक खाना हो.
ब्रिटिश फ़ूड इतिहासकार और लेखिका डॉक्टर ऐनी ग्रे का कहना है कि आज के समय में हम स्नैक को काफ़ी बुरा मानते हैं.
इमेज स्रोत, Getty Images इमेज कैप्शन, लोगों को जब भी भूख लगती है वह स्नैक्स खा लेते हैं
वह कहती हैं, “हम आमतौर पर स्नैक फ़ूड को ऐसी चीज़ मानते हैं जिसे हम आसानी से उठा लेते हैं और खाने के बीच खा लेते हैं. मुझे लगता है कि इसके साथ अक्सर एक तरह का गिल्ट जुड़ा होता है.”
डॉक्टर ग्रे बताती हैं कि स्नैकिंग कोई नई बात नहीं है बल्कि ये बहुत पुरानी आदत है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि हज़ारों साल पहले लोग स्नैक्स में क्या
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