नई दिल्ली/मुंबई | स्पोर्ट्स डेस्क
क्रिकेट के मैदान पर गिरकर संभलना हर किसी के बस की बात नहीं होती, लेकिन ईशान किशन ने साबित कर दिया है कि वह लंबी रेस के घोड़े हैं। सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी (SMAT) में झारखंड को अपनी कप्तानी में पहली बार चैंपियन बनाकर और फाइनल में तूफानी शतक जड़कर ईशान ने न सिर्फ इतिहास रचा है, बल्कि T20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए अपनी दावेदारी पर ‘मुहर’ भी लगा दी है।
अर्श से फर्श और फिर वापसी: संघर्ष की कहानी
यह वही ईशान किशन हैं, जिन्हें कुछ समय पहले ‘अनुशासन’ और ‘प्राथमिकता’ के सवालों में उलझाकर टीम इंडिया से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। लेकिन आज, यह खिलाड़ी अपने प्रदर्शन से चयनकर्ताओं को यह कहने पर मजबूर कर चुका है—“आप मुझे नजरअंदाज नहीं कर सकते।”
बीते डेढ़ साल ईशान के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं थे। 2023 के अंत में जब उन्होंने ‘मानसिक थकान’ (Mental Fatigue) का हवाला देकर दक्षिण अफ्रीका दौरे से ब्रेक लिया था, तो शायद उन्हें अंदाजा नहीं था कि इसकी कीमत क्या होगी। रणजी ट्रॉफी में हिस्सा न लेने और डोमेस्टिक क्रिकेट से दूरी बनाने के आरोपों के बीच उन्हें BCCI के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट से बाहर कर दिया गया। एक समय जो खिलाड़ी टीम इंडिया का भविष्य माना जा रहा था, वह अचानक मुख्य धारा से गायब हो गया।
आलोचनाएं हुईं, सवाल उठे, लेकिन ईशान खामोश रहे। उन्होंने जवाब जुबान से नहीं, बल्कि अपने बल्ले से देने की ठानी।
SMAT में ‘ईशान शो’: आंकड़े दे रहे गवाही
सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 2024-25 में ईशान किशन का बल्ला आग उगल रहा था।
📊 टूर्नामेंट के ‘रन मशीन’
ईशान ने इस सीजन में 517 रन बनाए, जो किसी भी बल्लेबाज द्वारा सबसे ज्यादा हैं।
🏆 फाइनल का ‘धमाका’
खिताबी मुकाबले में हरियाणा के खिलाफ जब टीम को जरूरत थी, तब कप्तान ने मोर्चा संभाला:
- 49 गेंदों में 101 रन की पारी
- 10 आसमानी छक्के शामिल थे
- यह पारी सिर्फ रन नहीं, बल्कि एक ‘स्टेटमेंट’ थी।
⚡ स्ट्राइक रेट का जादू
पूरे टूर्नामेंट में उनका स्ट्राइक रेट 190 के करीब रहा, जो आधुनिक T20 क्रिकेट की सबसे बड़ी मांग है।
T20 वर्ल्ड कप में क्यों जरूरी हैं ईशान?
आगामी T20 वर्ल्ड कप को देखते हुए ईशान किशन का फॉर्म भारतीय टीम के लिए ‘सोने पे सुहागा’ है।
टॉप ऑर्डर में यशस्वी जायसवाल के साथ या नंबर-3 पर एक आक्रामक बाएं हाथ का बल्लेबाज गेंदबाजों की लय बिगाड़ने के लिए जरूरी है।
ऋषभ पंत के अलावा टीम को एक ऐसे विकेटकीपर की तलाश थी जो ओपनिंग में भी विस्फोटक हो।
ईशान उन चुनिंदा खिलाड़ियों में से हैं जो पहली गेंद से ही आक्रमण करना जानते हैं, जैसा उन्होंने SMAT फाइनल में दिखाया।
ईशान किशन की वापसी की कहानी युवाओं के लिए एक सबक है—वक्त खराब हो सकता है, लेकिन अगर आपमे काबिलियत और मेहनत का जज्बा है, तो वापसी के रास्ते हमेशा खुले रहते हैं।
अब देखना दिलचस्प होगा कि नीली जर्सी में यह ‘पॉकेट डायनामाइट’ वर्ल्ड कप में क्या धमाका करता है। भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों को निश्चित ही उनसे बड़ी उम्मीदें हैं।
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