Supreme Court: सोनम रघुवंशी को सुप्रीम कोर्ट से झटका; रद्द हुई जमानत, तीन हफ्ते के भीतर आत्मसमर्पण का आदेश
हालांकि, जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने यह भी कहा कि अगर छह महीने के भीतर मुकदमे की सुनवाई पूरी नहीं होती है तो सोनम नई जमानत याचिका दाखिल करने के लिए स्वतंत्र होंगी। मेघालय सरकार की ओर से दायर अपील को स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी देना जरूरी है। लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं था कि गिरफ्तारी के कारण बिल्कुल भी नहीं बताए गए। कोर्ट ने कहा कि सोनम को 9 जून 2025 को गिरफ्तार किया गया था। इससे पहले पति की मौत के बाद वह कथित तौर पर लापता थीं। अभियोजन पक्ष का आरोप क्या है? अभियोजन पक्ष के अनुसार, शादी के बाद सोनम राजा रघुवंशी के साथ मेघालय गई थीं। वहां कथित तौर पर उनकी हत्या कर दी गई और तीन अन्य लोगों की मदद से उनका शव एक गहरी खाई में फेंक दिया गया। आरोप है कि इन तीनों लोगों को सोनम ने ही हत्या के लिए कथित तौर पर किराये पर रखा था। विवाद उस समय हुआ, जब गिरफ्तारी के कारणों में भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) की जगह धारा 403(1) का उल्लेख किया गया। सोनम ने जमानत के लिए क्या दलील दी थी? सुप्रीम कोर्ट के पिछले मिहिर राजेश शाह मामले का हवाला देते हुए सोनम ने दलील दी थी कि उन्हें गिरफ्तारी के सही कारणों की जानकारी नहीं दी गई, इसलिए वह जमानत की हकदार हैं। ट्रायल कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार कर लिया था और हाईकोर्ट ने भी उस आदेश को बरकरार रखा था। सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी नहीं देना और दी गई जानकारी में पर्याप्त विवरण न होना, दोनों अलग-अलग बातें हैं। क्या हुआ था मामला? मध्य प्रदेश के इंदौर …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...