Kapil Sibal: 'चुनाव आते ही ईडी को याद आते हैं दस्तावेज', कपिल सिब्बल बोले- विपक्ष को डराने का औजार बनी एजेंसी

पश्चिम बंगाल में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कार्रवाई को लेकर राज्य से लेकर देशभर की राजनीति में गर्माहट तेज है। इसी बीच इस कार्रवाई को लेकर राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि चुनाव आते ही जांच एजेंसियों को अचानक दस्तावेजों की याद आ जाती है और इसका मकसद सिर्फ विपक्षी नेताओं को परेशान करना होता है। पत्रकारों से बातचीत के दौरान सिब्बल ने पश्चिम बंगाल में ईडी की कार्रवाई का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में जहां भाजपा चुनाव नहीं जीत सकती, वहां ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को परेशान करने के लिए ईडी का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि कोई भी जांच एजेंसी किसी दफ्तर में जाकर सभी फाइलें कैसे ले जा सकती है। अगर कोयला घोटाले की जांच करनी है तो उससे जुड़ी फाइलें लें, लेकिन हर फाइल ले जाना किस अधिकार में है? किसी भी जांच एजेंसी को ऐसा करने का हक नहीं है। विपक्षी नेताओं को डराने के लिए हो रहा ईडी का इस्तेमाल- सिब्बल कपिल सिब्बल ने ईडी को एक सर्वव्यापी एजेंसी की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य कानून लागू करना नहीं, बल्कि विपक्षी नेताओं को डराना और परेशान करना है। उन्होंने केंद्र और राज्य के बीच बढ़ते टकराव का जिक्र करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में राज्य और केंद्र के बीच जानबूझकर विवाद पैदा किया जा रहा है। सिब्बल ने आगे कहा कि चुनाव के समय ही ऐसी कार्रवाइयां क्यों तेज हो जाती हैं। कोयला घोटाला कोई नया मामला नहीं है, यह कई वर्षों से चल रहा है। फिर अब ही अचानक कार्रवाई क्यों? राज्यसभा सांसद ने यूपीए सरकार के कार्यकाल (2004 से 2014) को याद करते हुए कहा कि उस समय इस तरह की खबर …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

January 10, 2026 · 2 min · National Desk

ईरान में क्यों भड़का देशव्यापी प्रदर्शन?: महंगाई से शुरू आंदोलन, कैसे विद्रोह में तब्दील; जानिए अभी तक क्या हुआ

इन प्रदर्शनों की शुरुआत 28 दिसंबर को रियाल के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने के बाद तेहरान के बाजारों से हुई, जहां व्यापारियों ने आसमान छूती महंगाई के खिलाफ दुकानें बंद कर प्रदर्शन शुरू किया। हालात तब और बिगड़े जब खाने के तेल, चिकन जैसी जरूरी चीजों की कीमतें रातोंरात बढ़ गईं और कई सामान बाजार से गायब हो गए। सरकार द्वारा सस्ती डॉलर व्यवस्था खत्म करने के फैसले ने आग में घी डालने का काम किया। अब तक ये प्रदर्शन सभी 31 प्रांतों में फैल चुका हैं। मानवाधिकार संगठन के मुताबिक, कम से कम 62 प्रदर्शनकारी मारे गए, जिनमें कई बच्चे भी शामिल हैं।यह आंदोलन 2022 के ‘वूमन, लाइफ, फ्रीडम’ आंदोलन के बाद सबसे बड़ा माना जा रहा है। अब तक 100 से ज्यादा शहरों में प्रदर्शन हो चुके हैं। पश्चिमी ईरान के कुर्द बहुल इलाकों में हालात सबसे ज्यादा तनावपूर्ण हैं। प्रदर्शनकारियों के नारे अब सीधे सत्ता के केंद्र पर हैं- ‘खामेनेई मुर्दाबाद’, ‘तानाशाह का नाश हो’ और रजा पहलवी के नेतृत्व में राजशाही की वापसी जैसे नारे तेहरान, मशहद और अन्य प्रमुख शहरों में खुलेआम लगाए जा रहे हैं। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

January 10, 2026 · 1 min · National Desk

Greenland: 'हम अमेरिकी नहीं बनेंगे', ग्रीनलैंड के पांच सियासी दलों की ट्रंप को दो टूक; डेनमार्क को भी सुनाया

बयान में पांचों दलों, जिसमें प्रधानमंत्री जेन्स फ्रेडरिक नीलसन सहित विपक्षी दल नालेराक के नेता भी शामिल हैं, उन्होंने कहा कि वे किसी भी अमेरिकी अधिग्रहण के गंभीर रूप से असम्मानजनक रुख के खिलाफ हैं। देर रात जारी बयान में नेताओं ने साफ कहा कि हम अमेरिकी नहीं होंगे, हम डेनिश नहीं होंगे, हम ग्रीनलैंडवासी हैं। सभी दलों की यह एकता विशेष रूप से इसलिए अहम है, क्योंकि इसमें विपक्षी पार्टी नालेराक के नेता पेले ब्रोबर्ग भी शामिल हैं, जो वाशिंगटन के साथ घनिष्ठ संबंध बनाने के लिए सबसे अधिक इच्छुक रही हैं।बता दें कि कुछ ही दिन पहले ब्रोबर्ग ने ग्रीनलैंड से डेनमार्क को दरकिनार करते हुए सीधे अमेरिका के साथ बातचीत करने का आह्वान किया था। अब बयान में इस बात पर जोर दिया गया है कि ग्रीनलैंड का भविष्य खुद ग्रीनलैंड के लोगों द्वारा तय किया जाना चाहिए, अंतर्राष्ट्रीय कानून और आत्मनिर्णय के अधिकार का सम्मान होना चाहिए।यह घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब राष्ट्रपति ट्रंप ने पिछले सप्ताह वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य अभियान के बाद अपनी बयानबाजी को और तेज कर दिया है। हाल ही में न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने साफ कहा कि ग्रीनलैंड पर अमेरिकी स्वामित्व सफलता के लिए मनोवैज्ञानिक रूप से जरूरी है। इसी के साथ उन्होंने सैन्य बल के प्रयोग की संभावना से इनकार नहीं किया। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

January 10, 2026 · 2 min · National Desk

UP: 'मैं बता दूं कि कोई न कोई साजिश चल रही PDA का वोट काटने की, वोटों को आधार से जोड़ा जाए'; अखिलेश की मांग

अखिलेश यादव ने लखनऊ में प्रेसवार्ता की। उन्होंने कहा, ये जो SIR का काम चल रहा है, किसी भी पार्टी ने इसका विरोध नहीं किया। मैं बता दूं कि कोई न कोई साजिश चल रही है। PDA समाज का वोट काटने की और अपना वोट बढ़ाने की। जब एक प्रतिष्ठित अखबार में ये बात सामने कि सरकार ने ये निर्देश दिए हैं कि हर बूथ में 200 वोट बढ़ाए जाएं, तब ये शक और भी गहरा हो जाता है। अखिलेश यादव ने कहा, जैसे ही ड्राफ्ट वोटर लिस्ट सामने आई, वैसे ही मेरी आशंकाएं सच साबित होती दिख रही हैं। मुझे करीब तीन करोड़ वोट काटे जाने की आशंका थी। प्रक्रिया के दौरान ही खुद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने पहले ही चार करोड़ वोट काटे जाने की बात सार्वजनिक मंचों पर कही थी। किसी को यह जानकारी नहीं थी कि कितने वोट हटाए जाएंगे अखिलेश यादव ने कहा, जब वोटर लिस्ट अभी आई भी नहीं थी और किसी को यह जानकारी नहीं थी कि कितने वोट हटाए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने अपने नेताओं, कार्यकर्ताओं और अधिकारियों के बीच यह बात कही कि करीब चार करोड़ वोट काटे जाएंगे। यह बयान रिकॉर्ड में है। कई लोगों ने सुना भी है। जब पहले से यह आंकड़ा तय कर लिया गया था, तो यह पूरी प्रक्रिया कितनी निष्पक्ष है। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

January 10, 2026 · 2 min · National Desk

Maharashtra: फडणवीस-शिंदे को फंसाने की किसने रची साजिश? ULC घोटाले पर पूर्व डीजीपी की रिपोर्ट से आया भूचाल

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पूर्व डीजीपी की यह रिपोर्ट महाराष्ट्र के गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को सौंपी गई है। जिसमें दावा किया गया है कि पूर्व डीजीपी संजय पांडे 2021 के अर्बन लैंड सीलिंग (ULC) घोटाले में फडणवीस और शिंदे को फंसाना चाहते थे, जो 160 करोड़ रुपये का कथित भ्रष्टाचार का मामला है।गोपनीय रिपोर्ट में दावा किया गया कि साल 2021 में तत्कालीन पुलिस महानिदेशक संजय पांडे ने तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष और वर्तमान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे को यूएलसी घोटाले में झूठे आरोपों में फंसाने की कोशिश की। रिपोर्ट के मुताबिक पांडे ने कथित तौर पर ठाणे पुलिस अधिकारियों को तत्कालीन विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस को घोटाले के मामले में फंसाने का आदेश दिया था।आरोपों से पता चलता है कि संजय पांडे ने न सिर्फ फडणवीस और शिंदे को फंसाने के साथ उन्हें गिरफ्तार करने का भी आदेश दिया था, जो कथित साजिश के वक्त शहरी विकास मंत्री थे। बताया गया है कि पूर्व डीजीपी ने ठाणे के डीसीपी लक्ष्मीकांत पाटिल और एसीपी सरदार पाटिल को 2016 के यूएलसी मामले में फडणवीस और शिंदे को आरोपी के रूप में पेश करने और बिल्डरों से अवैध वसूली करने के रूप में निर्देशित किया था। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

January 10, 2026 · 1 min · National Desk

Ajit Doval: 'देश का बदला लेना होगा', NSA अजीत डोभाल ने क्यों कही ये बात? बोले- हमने नहीं तोड़े किसी के मंदिर..

एनएसए ने कहा कि यह भारत वैसा स्वतंत्र नहीं था जैसा आप आज देखते हैं। हमारे पूर्वजों ने बलिदान दिए, अपमान सहे और कई लोगों को फांसी दी गई। भगत सिंह को फांसी दी गई, सुभाष चंद्र बोस ने जीवन भर संघर्ष किया और महात्मा गांधी ने सत्याग्रह का मार्ग प्रशस्त किया। अनगिनत लोगों ने अपनी जान गंवाई। हमारे मंदिर नष्ट किए गए, गांवों को लूटा गया और हमारी सभ्यता को कुचल दिया गया, जबकि हम असहाय, मूक दर्शक बने रहे। इतिहास हमें चुनौती देता है। आज के युवाओं में वह जोश है। हालांकि बदला लेना अच्छा शब्द नहीं है, लेकिन यह शक्तिशाली है। हमें अपने मूल्यों पर आधारित एक महान भारत का पुनर्निर्माण करके अपने देश का बदला लेना होगा। एनएसए डोभाल ने युवाओं से संवाद करते हुए कहा, ‘मेरा कार्यक्षेत्र अलग है, मेरा अनुभव अलग है, और युवाओं के साथ उम्र का बहुत बड़ा अंतर है। आपमें से अधिकांश मुझसे 60 वर्ष से अधिक छोटे हैं, इसलिए मैं थोड़ा असमंजस में था कि आऊं या नहीं। मेरा जन्म स्वतंत्र भारत में नहीं, बल्कि स्वतंत्रता-पूर्व भारत में हुआ था। मेरी जवानी तो कब की बीत चुकी है।‘अजीत डोभाल ने कहा, ‘आज इतना कुछ बदल गया है कि मुझे सब कुछ पता नहीं है। लेकिन एक बात समान है, चाहे आप इसे महसूस करें या न करें - एक छोटी सी बात जो आपके जीवन की दिशा तय करती है: निर्णय लेने की क्षमता। आप सभी हर दिन छोटे-बड़े फैसले लेते हैं, और जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ेगी, आपको हर कदम पर फैसले लेने होंगे। भारत विकसित होगा, यह निश्चित है।‘उन्होंने कहा, ‘दुनिया भर में चल रहे सभी संघर्ष और युद्ध इसलिए हैं क्योंकि कुछ देश दूसरों पर अपनी इच्छा थोपना चाहते हैं और इसके लिए अपनी पूरी शक्ति का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन अगर आप शक्तिशाली हैं, …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

January 10, 2026 · 2 min · National Desk

Iran Protests: ईरान में क्यों सुप्रीम लीडर खामेनेई की तस्वीर से सिगरेट जला रहीं युवतियां? बनीं आंदोलन का चेहरा

🚨It’s being reported he President of Iran, Pezeshkian, resigned and Khamenei was eliminated. What an iconic image! The symbolism brings tears to my eyes. If true, she’s free. No more burka, no more Sharia.#IranProtests #IranRevolution2026 pic.twitter.com/UyZ7ZsQ3As pic.twitter.com/I8KXXX9bfr — ElizaTino (@elizatino) January 10, 2026 Burning headscarves in Tehran tonight. Iranians are also setting fire to possessions of the regime forces, including cars, mosques, and their homes. They are sending Khamenei a message. But they are also trying to send the world a message. Please help spread it. pic.twitter.com/pTIrAMzVFu — dahlia kurtz ✡︎ דליה קורץ (@DahliaKurtz) January 10, 2026 इस्लामिक गणराज्य ईरान में खामेनेई की धार्मिक सरकार के खिलाफ लोगों में भारी रोष है। वहीं मौतों की संख्या बढ़ने के साथ ही विरोध प्रदर्शन और भी हिंसक होते जा रहे हैं। इस बीच देश में इंटरनेट और टेलीफोन सेवा पर पाबंदी लगाई जा चुकी है। ये विरोध प्रदर्शन दिसंबर के अंत में शुरू हुए और देश में 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से चली आ रही धार्मिक व्यवस्था के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन चुका है।सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो की ‘अमर उजाला’ स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है। तमाम वायरल हुए वीडियो में ईरानी महिलाओं को सर्वोच्च नेता की तस्वीरों को जलाकर सिगरेट जलाते हुए देखा जा सकता है। इसी के साथ तेहरान से सामने आए कुछ अपुष्ट वीडियो में कथित तौर पर महिलाओं को हिजाब जलाते हुए भी देखा गया है।खामेनई से जलती तस्वीरों से महिलाओं का सिगरेट जलाना हो या फिर विरोध प्रदर्शनों की …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

January 10, 2026 · 2 min · National Desk

Ajit Doval: 'देश ऑटोपायलट पर भी चला, तो बन जाएगा विकसित भारत', एनएसए अजीत डोभाल का बड़ा बयान

एनएसए ने कहा कि यह भारत वैसा स्वतंत्र नहीं था जैसा आप आज देखते हैं। हमारे पूर्वजों ने बलिदान दिए, अपमान सहे और कई लोगों को फांसी दी गई। भगत सिंह को फांसी दी गई, सुभाष चंद्र बोस ने जीवन भर संघर्ष किया और महात्मा गांधी ने सत्याग्रह का मार्ग प्रशस्त किया। अनगिनत लोगों ने अपनी जान गंवाई। हमारे मंदिर नष्ट किए गए, गांवों को लूटा गया और हमारी सभ्यता को कुचल दिया गया, जबकि हम असहाय, मूक दर्शक बने रहे। इतिहास हमें चुनौती देता है। आज के युवाओं में वह जोश है। हालांकि बदला लेना अच्छा शब्द नहीं है, लेकिन यह शक्तिशाली है। हमें अपने मूल्यों पर आधारित एक महान भारत का पुनर्निर्माण करके अपने देश का बदला लेना होगा। एनएसए डोभाल ने युवाओं से संवाद करते हुए कहा, ‘मेरा कार्यक्षेत्र अलग है, मेरा अनुभव अलग है, और युवाओं के साथ उम्र का बहुत बड़ा अंतर है। आपमें से अधिकांश मुझसे 60 वर्ष से अधिक छोटे हैं, इसलिए मैं थोड़ा असमंजस में था कि आऊं या नहीं। मेरा जन्म स्वतंत्र भारत में नहीं, बल्कि स्वतंत्रता-पूर्व भारत में हुआ था। मेरी जवानी तो कब की बीत चुकी है।‘अजीत डोभाल ने कहा, ‘आज इतना कुछ बदल गया है कि मुझे सब कुछ पता नहीं है। लेकिन एक बात समान है, चाहे आप इसे महसूस करें या न करें - एक छोटी सी बात जो आपके जीवन की दिशा तय करती है: निर्णय लेने की क्षमता। आप सभी हर दिन छोटे-बड़े फैसले लेते हैं, और जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ेगी, आपको हर कदम पर फैसले लेने होंगे। भारत विकसित होगा, यह निश्चित है।‘उन्होंने कहा, ‘दुनिया भर में चल रहे सभी संघर्ष और युद्ध इसलिए हैं क्योंकि कुछ देश दूसरों पर अपनी इच्छा थोपना चाहते हैं और इसके लिए अपनी पूरी शक्ति का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन अगर आप शक्तिशाली हैं, …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

January 10, 2026 · 2 min · National Desk

Uttarakhand Weather: बारिश-बर्फबारी की बेरुखी का असर, छह जिलों में घने कोहरे की चेतावनी, सूख ठंड कर रही परेशान

उत्तराखंड में बारिश-बर्फबारी की बेरुखी का सीधा असर तापमान पर पड़ने लगा है। प्रदेश भर में सूखी ठंड परेशान कर रही है। पर्वतीय इलाकों में शीतलहर व पाला तो मैदानी इलाकों में कोहरा खूब परेशान कर रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से 10 जनवरी को भी प्रदेश के मैदानी जिले देहरादून, ऊधमसिंह नगर व हरिद्वार समेत नैनीताल, चंपावत और पौड़ी में घने कोहरा का येलो अलर्ट जारी किया गया है। हालांकि पर्वतीय क्षेत्रों में दिन में धूप खिलने से ठंड से थोड़ी राहत मिल रही है।आने वाले दिनों की बात करें तो 15 जनवरी तक प्रदेशभर में मौसम शुष्क रहने की संभावना है। शुक्रवार को दून में दिन का अधिकतम तापमान सामान्य से 3.5 डिग्री बढ़ोतरी के साथ 22.8 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। जबकि रात का न्यूनतम तापमान सामान्य से दो डिग्री कमी के साथ 4.6 डिग्री रहा। ऐसा ही हाल प्रदेश के अन्य इलाकों का भी रहा। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

January 10, 2026 · 1 min · National Desk

Pune Civic Polls: निकाय चुनाव के लिए चाचा-भतीजा एकसाथ, अजित पवार के साथ मंच पर दिखीं सुप्रिया; घोषणा पत्र जारी

एनसीपी और एनसीपी (शरद पवार) ने शनिवार को पुणे नगर निगम चुनाव में एक साथ चुनाव लड़ने के फैसले के बाद अपना संयुक्त घोषणापत्र जारी किया। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री अजित पवार और सांसद सुप्रिया सुले ने एक ही मंच साझा किया। शरद पवार और अजीत पवार की पार्टी पुणे और पिंपरी चिंचवाड़ में निकाय चुनाव एकसाथ लड़ रही है। अजित पवार ने कहा हमारा मकसद पुणे के नागरिकों के लिए विकास और स्थिरता सुनिश्चित करना है। इस संयुक्त घोषणापत्र के माध्यम से हम शहर की जनता के सामने अपनी स्पष्ट नीति पेश कर रहे हैं। वहीं सुप्रिया सुले ने भी कहा कि पार्टी सभी वर्गों और समाज के हितों को ध्यान में रखते हुए चुनावी रणनीति बनाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि संयुक्त मंच से भाजपा और अन्य विपक्षी पार्टियों के सामने मजबूत संदेश जाएगा।गौरतलब है कि महाराष्ट्र में 15 जनवरी को 29 नगर निगमों, जिनमें पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ शामिल हैं, के लिए चुनाव होने हैं। राज्य चुनाव आयोग ने 15 जनवरी को इन क्षेत्रों में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है ताकि अधिक से अधिक लोग वोट डालें। आयोग ने 70% से ज्यादा मतदान सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया है।पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ जैसे बड़े शहरी क्षेत्रों में भाजपा अपनी पकड़ बनाए रखने की कोशिश कर रही है, जबकि एनसीपी पिंपरी-चिंचवाड़ के 32-वार्ड निगम में वापसी की तैयारी कर रही है। इस निगम में लगभग 17.13 लाख मतदाता होंगे, जो 128 पार्षदों का चुनाव करेंगे। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

January 10, 2026 · 2 min · National Desk