सुप्रीम कोर्ट: वैवाहिक दुष्कर्म पर अदालत सख्त, कहा- शादी के बाद पत्नी की सहमति का अधिकार खत्म नहीं होता है
पहले किस अपील पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट? मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल हैं। पीठ ने कहा कि वह सबसे पहले कर्नाटक हाईकोर्ट के उस फैसले से जुड़ी अपील पर सुनवाई करेगी, जिसमें पत्नी के साथ कथित यौन हिंसा के मामले में पति के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा चलाने की अनुमति दी गई थी। वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह पत्नी की ओर से पेश हुईं। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने इस मामले में पत्नी को लगभग यौन गुलाम की तरह रखे जाने की स्थिति को देखते हुए मुकदमा चलाने की अनुमति दी थी। उनका तर्क है कि मौजूदा कानून की व्याख्या के जरिए भी ऐसे मामले में मुकदमा चलाया जा सकता है, यानी वैवाहिक दुष्कर्म के अपवाद को तुरंत खत्म करना जरूरी नहीं है। क्या मौजूदा कानून की व्याख्या करके पति पर मुकदमा चलाया जा सकता है? क्या शादी के बाद महिला की व्यक्तिगत स्वायत्तता खत्म हो जाती है? निर्भया कांड के बाद दुष्कर्म कानून में क्या बदला? सुनवाई के दौरान वकीलों ने बताया कि 2012 के निर्भया कांड के बाद भारत के यौन अपराधों से जुड़े कानून में बड़े बदलाव किए गए थे। दुष्कर्म की कानूनी परिभाषा को केवल पुरुष जननांग के प्रवेश तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि दूसरे प्रकार के प्रवेश को भी इसमें शामिल किया गया। इसी दौरान वैवाहिक अपवाद में इस्तेमाल होने वाले शब्दों को भी बदला गया और यौन संबंध की जगह यौन संबंध या यौन कृत्य किया गया। करुणा नंदी ने यह भी कहा कि शादी के भीतर होने वाली दूसरी तरह की यौन हिंसा पर भी इस अपवाद का असर पड़ता है। उन्होंने बीएनएस में धारा 377 को हटाए जाने का मुद्दा भी उठाया और पूछा कि ऐसे मामलों में कानूनी उपा …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...