Bihar: 'मैं रूस में था, फिर भी बना दिया आरोपी', NEET केस में युवक का सनसनीखेज दावा, नया विवाद आया सामने

बिहार में NEET पेपर लीक के विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामलों के बीच अब एक नया विवाद सामने आया है। किशनगंज जिले के एक युवक ने दावा किया है कि उसका नाम प्रदर्शन से जुड़े मामले में दर्ज कर दिया गया, जबकि वह पिछले चार महीने से रूस में रह रहा है। युवक का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें उसने खुद को निर्दोष बताते हुए निष्पक्ष जांच और एफआईआर से नाम हटाने की मांग की है। हालांकि, वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। किशनगंज जिले के रहने वाले मोहम्मद सदाकत ने दावा किया है कि पुलिस ने NEET पेपर लीक विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में उनका नाम एफआईआर में शामिल कर लिया, जबकि वह पिछले चार महीने से रूस में रह रहे हैं। मोहम्मद सदाकत का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में उन्होंने कहा है कि वह पिछले चार महीने से रूस में हैं और 25 जुलाई को बहादुरगंज में हुए प्रदर्शन के दौरान भारत में मौजूद ही नहीं थे। हालांकि, इस वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।वीडियो में सदाकत ने सवाल उठाया कि जब वह देश में ही नहीं थे, तो उनके खिलाफ मामला कैसे दर्ज कर दिया गया। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और एफआईआर से अपना नाम हटाने की मांग की है।इस मामले पर किशनगंज के पुलिस अधीक्षक हरि मोहन शुक्ला से संपर्क किया गया। उन्होंने सदाकत के दावे की न तो पुष्टि की और न ही उसका खंडन किया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन से जुड़े मामलों में यदि किसी को कोई शिकायत है, तो वह पुलिस के पास आकर अपनी बात रख सकता है। उसकी शिकायत पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।बिहार सरकार ने सोमवार को घोषणा की थी कि NEET पेपर लीक के विरोध प्रदर्शन के दौरान द …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

July 29, 2026 · 2 min · National Desk

MP: नहीं रहे आधुनिक जंगल युद्ध प्रणाली के योद्धा रिटायर्ड ब्रिगेडियर बसंत कुमार, 1971 की जंग में थी अहम भूमिका

1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के योद्धा और नक्सली उग्रवाद के खिलाफ देश में आधुनिक जंगल युद्ध प्रणाली के शिल्पकार रहे ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) बसंत कुमार पंवार का महू में निधन हो गया। बुधवार को उनके परिजनों ने यह जानकारी दी। 77 वर्षीय पंवार के दो पुत्र हैं। दोनों बेटे वर्तमान में भारतीय सेना में सेवा दे रहे हैं। 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान एक युवा अधिकारी के रूप में पंवार ने सीमा पार अभियानों में हिस्सा लिया। उन्होंने मुक्ति वाहिनी के लड़ाकों के साथ मिलकर कई घात लगाकर हमलों का नेतृत्व किया और ढाका की ओर बढ़ने वाले अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बाद उन्होंने भारतीय सेना व मिजोरम और छत्तीसगढ़ पुलिस बलों में पांच दशक से अधिक समय तक राष्ट्र की सुरक्षा के लिए अपनी सेवाएं समर्पित कीं।3 मार्च 1949 को इंदौर में जन्मे बसंत कुमार पंवार दिसंबर 1969 में मराठा लाइट इन्फैंट्री की पहली बटालियन में कमीशंड अधिकारी बने। 1971 के युद्ध के दौरान 95 माउंटेन ब्रिगेड के अधीन सेवा देते हुए उन्होंने कमालपुर और बक्शीगंज में दुश्मन के ठिकानों पर हमलों का नेतृत्व किया। बाद में उन्होंने ऐतिहासिक टंगाइल पैराड्रॉप अभियान में एक महत्वपूर्ण संपर्क अधिकारी की भूमिका निभाई। अपने 36 वर्षों के गौरवशाली सैन्य करियर में उन्होंने 1 मराठा लाइट इन्फैंट्री की कमान संभाली और मिजोरम के वैरेंगटे स्थित सेना के काउंटर इंसर्जेंसी एंड जंगल वारफेयर स्कूल (सीआईजेडब्ल्यूएस) के कमांडेंट रहे। वर्ष 2004 में उन्होंने पहले भारत-अमेरिका संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘युद्ध अभ्यास’ की निगरानी भी की। उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें अति विशिष्ट सेवा पदक (एवीएसएम) और विशिष्ट सेवा पदक (वीएसएम) से सम्मानित किया …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

July 29, 2026 · 2 min · National Desk

भोजशाला विवाद: वैकल्पिक नमाज स्थल पर फिर बढ़ा विवाद, मुस्लिम पक्ष की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई कल

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मुस्लिम पक्ष की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई है। इस याचिका में मध्य प्रदेश के धार जिले में विवादित भोजशाला परिसर के पास शुक्रवार की नमाज अदा करने के लिए वैकल्पिक स्थल उपलब्ध कराने के निर्देश का पालन न करने का आरोप लगाया गया है। 24 जुलाई को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची तथा वी मोहना की पीठ ने बुधवार को याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई थी। हालांकि, पीठ के जल्दी स्थगित होने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी। सुनवाई कब होगी? वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी ने इस मामले का जिक्र तब किया जब बेंच दिन भर की कार्यवाही समाप्त करने वाली थी। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि याचिका पर गुरुवार को सुनवाई होगी। सुनवाई के दौरान, मुख्य न्यायाधीश ने मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा, ‘आप अहमदी को वैकल्पिक स्थल का विवरण क्यों नहीं देते?’ वरिष्ठ अधिवक्ता ने क्या कहा? अहमदी ने कहा, ‘आपके आदेशों का पालन नहीं किया जा रहा है। यह स्थल 1.3 किलोमीटर दूर है और (जिला) कलेक्टर ने आदेश जारी कर कहा है कि केवल यही स्थल आवंटित किया जाएगा।’ उन्होंने कहा कि अदालत के पहले के निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है। विधि अधिकारी ने कहा कि प्रशासन ने एक अन्य स्थान की पहचान कर ली है। उन्होंने पीठ के सामने कहा कि ’ नहीं, नहीं। हम फिर मिले। हमें एक और जगह मिल गई है। हालांकि, अहमदी ने प्रस्तावित स्थान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह अनुपयुक्त और बहुत दूर है। उन्होंने कहा कि भोजशाला स्थल के पास एक दरगाह है, और उसके सामने जमीन है जिसे आवंटित किया जा सकता है। कोर्ट ने पिछले सुनवाई में क्या कहा? 14 …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

July 29, 2026 · 2 min · National Desk

राम मंदिर चढ़ावा चोरी: नई एसआईटी ने संभाली जांच की कमान, वर्चुअल बैठक में लिया सारा ब्योरा

चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच के लिए गठित नई एसआईटी ने अभी औपचारिक बैठक नहीं की है लेकिन जांच को लेकर टीम सक्रिय हो गई है। सूत्रों के अनुसार एसआईटी के तीनों अधिकारियों ने वर्चुअल बैठक कर अब तक हुई जांच और पुलिस की कार्रवाई की जानकारी ली है। राम मंदिर की दान पेटिकाओं से चोरी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 20 जुलाई को ही नई एसआईटी गठित करने का निर्देश दिया था। इसके अनुपालन में प्रदेश सरकार ने 26 जुलाई को ही नई एसआईटी गठित की है। इसमें लखनऊ के आईजी किरण एस के अलावा अयोध्या रेंज के डीआईजी सोमेन बर्मा और एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर को भी शामिल किया गया है। आगे की विवेचना अब इसी टीम के पर्यवेक्षण में आगे बढ़ना है। ऐसे में अब तक की विवेचना, आरोपियों से हुई पूछताछ, सामने आए साक्ष्य, संपत्तियों से जुड़े तथ्यों और अन्य बिंदुओं की समीक्षा एसआईटी के स्तर से होगी।डीआईजी और एसएसपी इस मामले से अभी तक अलग नहीं थे। दोनों की निगरानी में ही स्थानीय पुलिस मामले की जांच कर रही थी। पुलिस की कार्रवाई और विवेचना में उठाए जाने वाले कदम भी इन्हीं के पर्यवेक्षण में लिए जा रहे थे। फर्क इतना था कि उनकी भूमिका पर्दे के पीछे पर्यवेक्षण तक सीमित थी। अब नई एसआईटी में शामिल होने के बाद यही अधिकारी जांच की निगरानी में औपचारिक रूप से सामने होंगे।एसआईटी में शामिल होने के बाद तीनों अधिकारियों ने आपस में समन्वय स्थापित किया है। इसके लिए उनकी वर्चुअल बैठक हुई है। इस बैठक को जांच आगे बढ़ने की दिशा में पहला कदम माना जा रहा है। अब एसआईटी पहले से हुई कार्रवाई का पूरा ब्योरा जुटाएगी। किन पहलुओं पर काम करने की आवश्यकता है, इसका भी निर्धारण होगा। इसके बाद जरूरत के मुताबिक विवेचना की दिशा तय की जा सकती है। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

July 29, 2026 · 2 min · National Desk

केरल में पुलिस संघों के पुनर्गठन पर सियासी घमासान: पिनाराई विजयन ने UDF सरकार पर लगाए गंभीर आरोप; क्या कहा?

केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने बुधवार को कांग्रेस नीत यूडीएफ सरकार पर बड़ा आरोप लगाया। विजयन ने पुलिस संघों के एकतरफा पुनर्गठन के जरिए राज्य पुलिस को राजनीतिक नियंत्रण में लाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। एक बयान में पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि सरकार ने संबंधित पक्षों से बिना किसी चर्चा के पुलिस संघों का पुनर्गठन किया है, जो “बेहद अलोकतांत्रिक” है और पुलिसकर्मियों की संगठनात्मक स्वतंत्रता पर हमला है। विजयन ने दावा किया कि राज्य में वर्ष 1979 से पुलिस संघ काम कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने संबंधित पक्षों से सलाह किए बिना मौजूदा व्यवस्था को “तानाशाही तरीके” से खत्म कर दिया।विजयन ने लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई समितियों की जगह तदर्थ समितियां बनाए जाने की खबरों की आलोचना करते हुए कहा कि यह पुलिस संघों की स्वायत्तता में अस्वीकार्य हस्तक्षेप है। माकपा नेता ने आरोप लगाया कि पुनर्गठन के तहत ग्रेड पदोन्नति प्राप्त अधिकारियों का दर्जा घटाया गया है और एक ही रैंक के कर्मचारियों को अलग-अलग संघों में बांटा गया है। उनके अनुसार, इससे पुलिस बल की एकजुटता और मनोबल कमजोर होगा।विजयन ने आरोप लगाया कि सरकार पुलिस का राजनीतिकरण कर उसे अपने हितों के अधीन काम करने वाला बल बनाना चाहती है। उन्होंने मांग की कि सभी संबंधित पक्षों से चर्चा करने के बाद इस संबंध में जारी कथित आदेश को तत्काल वापस लिया जाए। विजयन की यह टिप्पणी उन मीडिया रिपोर्टों के बीच आई है, जिनमें कहा गया है कि यूडीएफ सरकार ने मान्यता प्राप्त पुलिस संघों की संख्या तीन से घटाकर दो कर दी है। इसके चलते केरल पुलिस ऑफिसर्स एसोसिएशन को भंग किए जाने की भी …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

July 29, 2026 · 2 min · National Desk

'बाबरी मस्जिद को नहीं गिराना चाहिए था' कहना राष्ट्रविरोधी नहीं: हाईकोर्ट की टिप्पणी, SDPI नेताओं को दी राहत

जज ने क्या कहा? जस्टिस माधव जामदार ने कहा कि विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी प्राथमिकी के आधार पर दोनों लोगों के खिलाफ जारी तड़ीपार आदेश कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं लगते। खासकर तब, जब इन्हीं प्रदर्शनों में अन्य राजनीतिक दलों ने भी हिस्सा लिया था। कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि यह कार्रवाई चुनिंदा तरीके से की गई लगती है और दोनों याचिकाकर्ताओं के मुस्लिम समुदाय से होने के कारण प्रभावित हो सकती है। जज ने कहा, प्राथमिकी सभी राजनीतिक दलों के खिलाफ है। लेकिन केवल इन याचिकाकर्ताओं को निशाना बनाया गया। उन्होंने आगे कहा, कार्रवाई चुनिंदा तरीके से नहीं की जा सकती। क्या आपने कांग्रेस पार्टी के राजनीतिक कार्यकर्ताओं, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) के कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की है? सिर्फ इसलिए कि वे एक धर्म से जुड़े हैं? कोर्ट ने यह भी कहा कि ‘अयोध्या में बाबरी मस्जिद को नहीं गिराया जाना चाहिए था’, ऐसा विचार रखना राष्ट्रविरोधी नहीं है। किसी भी नागरिक को इस मुद्दे पर अपनी राय रखने का अधिकार है। याचिकाकर्ता फिरोज अब्दुल वहाब खान और मोहम्मद रफीक गुलाम रसूल अंसारी ने 3 दिसंबर 2025 को जारी तड़ीपार आदेश को चुनौती दी थी। इस आदेश के तहत उन्हें एक साल के लिए मुंबई से बाहर रहने को कहा गया था। ये आदेश 2024 और 2025 में दर्ज तीन प्राथमिकी के आधार पर जारी किए गए थे। इनमें वक्फ विधेयक को लेकर हुए प्रदर्शन, चेंबूर-गोवंडी में सीमेंट गोदामों से होने वाले वायु प्रदूषण और बाबरी मस्जिद मुद्दे से जुड़े विरोध प्रदर्शन शामिल थे। याचिकाकर्ताओं के वकील ने क्या दलील दी? याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील इब्राहिम हरबत ने दलील दी कि कथित घटनाओं में महारा …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

July 29, 2026 · 2 min · National Desk

Russia: रूस ने टेलीग्राम फाउंडर पावेल दुरोव पर लगाया आतंकवाद में मदद करने का आरोप, वॉन्टेड लिस्ट में डाला नाम

टेलीग्राम एप के फाउंडर पावेल दुरोव को बुधवार बड़ा झटका लगा है। रूस ने पावेल दुरोव पर आतंकवाद में मदद करने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही उन्हें इंटरनेशनल वॉन्टेड लिस्ट में डाल दिया है। यह जानकारी एपी रिपोर्ट के अनुसार है। सुरक्षा एजेंसी ने क्या कहा? रूस की मुख्य घरेलू सुरक्षा एजेंसी ने बुधवार को एक बयान दिया। इसमें कहा कि टेलीग्राम के एडमिनिस्ट्रेशन ने रूस में ऐसे कई चैनलों, चैट्स और बॉट्स को नहीं हटाया है, जिनका इस्तेमाल यूक्रेनी इंटेलिजेंस एजेंसियों, आतंकवादी और चरमपंथी संगठन कर रही है। इस का इस्तेमाल तोड़-फोड़, आतंकवाद, सामूहिक हत्या और साइबर धोखाधड़ी की घटनाओं की तैयारी और उन्हें अंजाम देने के लिए किया जा रहा है।दुरोव पर ये आरोप तब लगे हैं जब रूस ने टेलीग्राम पर पाबंदियां लगाई हैं। टेलीग्राम देश के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप्स में से एक है। दुरोव ने इस साल की शुरुआत में बताया था कि रूसी अधिकारियों ने उनके खिलाफ आपराधिक जांच शुरू की है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी टेलीग्राम तक पहुंच को रोकने के लिए झूठे बहाने बना रहे हैं। ताकि प्राइवेसी और बोलने की आजादी के अधिकार को दबाया जा सके।’ (यह खबर अपडेट हो रही है) …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

July 29, 2026 · 1 min · National Desk

Explainer: पेपर लीक रोकने के लिए लाया गया कानून दो साल में ही बदलने की नौबत क्यों आई, नए बिल में क्या नया?

2024 में लागू किए गए कानून में क्या है? देश में भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक, नकल, फर्जी परीक्षा, फर्जी एडमिट कार्ड, उत्तर कुंजी लीक और परीक्षा माफिया के मामलों को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 बनाया था। यह कानून 12 फरवरी 2024 को पारित हुआ और 21 जून 2024 से पूरे देश में लागू हुआ। यह देश का पहला विशेष केंद्रीय कानून है, जो केवल सार्वजनिक परीक्षाओं में होने वाली धांधली और पेपर लीक से निपटने के लिए बनाया गया था। यह कानून क्यों लाया गया था? सरकार ने कानून के उद्देश्य में इसकी कई वजहें बताई थी। 1. पेपर लीक से लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा था बार-बार पेपर लीक और परीक्षा में धांधली के कारण परीक्षाएं रद्द या स्थगित करनी पड़ रही थीं। इससे भर्ती और प्रवेश प्रक्रिया में देरी होती थी और लाखों अभ्यर्थियों की मेहनत, समय और करियर प्रभावित हो रहा था। 2. कोई अलग केंद्रीय कानून नहीं था सरकार ने माना कि 2024 से पहले केंद्र सरकार और उसकी एजेंसियों द्वारा आयोजित सार्वजनिक परीक्षाओं में होने वाली धांधली से निपटने के लिए कोई विशिष्ट केंद्रीय कानून नहीं था। ऐसे मामलों में आईपीसी, आईटी एक्ट और अन्य कानूनों के तहत कार्रवाई होती थी, लेकिन परीक्षा माफिया और पेपर लीक पर केंद्रित कोई व्यापक कानून नहीं था। 3. परीक्षा माफिया पर सख्त कार्रवाई जरूरी थी सरकार के अनुसार, कुछ संगठित गिरोह और संस्थाएं परीक्षा प्रणाली की कमजोरियों का फायदा उठाकर आर्थिक लाभ के लिए पेपर लीक और अन्य धांधली कर रहे थे। इन संगठित नेटवर्क के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई के लिए अलग कानून की जरूरत थी। 4. परीक्षा प्रणाली में भरो …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

July 29, 2026 · 2 min · National Desk

अमेरिका-ईरान तनाव: खत्म हुआ ऑपरेशन एपिक फ्यूरी? बलिदानियों के आंकड़े पर उठे सवाल, जानें पेंटागन का नया खेल

डिफेंस कैजुअल्टी एनालिसिस सिस्टम (डीसीएएस) ने हालिया हमले में मारे गए चार सैनिकों और दर्जनों घायलों के नाम ईरान युद्ध की पुरानी लिस्ट से हटा दिए हैं। अब इन्हें ‘ओवरसीज ऑपरेशंस’ नाम की नई कैटेगरी में डाला गया है।इस कदम से अब अमेरिकी सेना पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आलोचकों का मानना है कि अमेरिका युद्ध में अपने सैनिकों के नुकसान को कम करके दिखाने की कोशिश कर रहा है। पेंटागन के इस नए कदम के बाद अब ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ और नई कैटेगरी को मिलाकर कुल घायल सैनिकों की संख्या 642 तक पहुंच गई है।जुलाई में मारे गए चार अमरीकी जवानों को ईरान युद्ध की मुख्य लिस्ट से हटाकर ‘ओवरसीज ऑपरेशंस’ में डाला गया।जॉर्डन में 17 जुलाई को ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमले में तीन जवान मारे गए, जबकि 18 जुलाई को इराक में एक जवान की मौत हुई।यह पूरी हिंसा अमेरिका की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य पर कब्जा बनाए रखने के लिए की गई दो सप्ताह की एयरस्ट्राइक के बाद भड़की।देश मंत्री मार्को रूबियो ने मई में ही कहा था कि यह ऑपरेशन पूरा हो चुका है। वहीं रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने संसद में सितंबर तक के खर्च का अनुमान पेश किया था।पेंटागन ने पहले लिस्ट से नाम हटने को ‘डाटा खराबी’ बताया था, लेकिन अब उन्हें नई कैटेगरी में आधिकारिक रूप से दर्ज कर दिया गया है।अमेरिका और ईरान के बीच अप्रैल में एक अस्थायी युद्धविराम हुआ था। इसके बाद जून के मध्य में एक अंतरिम समझौते पर दस्तखत भी किए गए थे।लेकिन इसी महीने जब ईरान ने समुद्री व्यापारिक मार्ग में जहाजों पर हमला किया, तो अमेरिका ने दोबारा एयरस्ट्राइक शुरू कर दी। जवाब में ईरान ने अमरीकी ठिकानों की मेजबानी करने वाले पड़ोसी देशों पर मिसाइलें दाग दीं। अमेरिका की सेंट्रल कमां …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

July 29, 2026 · 2 min · National Desk

Parliament Monsoon Session 2026: पेपर लीक के मुद्दे पर आज फिर संसद में बहस, राहुल गांधी बोलेंगे सरकार पर हमला

09:09 AM, 29-Jul-2026 कावेरी जल विवाद: राज्यसभा में कांग्रेस सांसद प्रवीन चक्रवर्ती ने दिया काम रोको प्रस्ताव कांग्रेस सांसद प्रवीन चक्रवर्ती ने राज्यसभा में काम रोको प्रस्ताव का नोटिस दिया है। उन्होंने जल शक्ति मंत्रालय पर 27 जुलाई 2026 को सदन में भ्रामक जवाब देने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही उन्होंने कावेरी जल नियमन समिति (CWRC) के आदेश का मुद्दा भी उठाया है। समिति ने कर्नाटक को तुरंत 4 टीएमसी फीट पानी छोड़ने का निर्देश दिया था। प्रवीन चक्रवर्ती का कहना है कि जल बंटवारे के इस आदेश का पालन होना चाहिए। उन्होंने संसद में इस संवेदनशील विषय पर तुरंत चर्चा की मांग की है। 09:06 AM, 29-Jul-2026 लोकसभा में एंटी-डिफेक्शन लॉ पर काम रोको प्रस्ताव, मनीष तिवारी ने उठाई नए कानून की मांग कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में काम रोको प्रस्ताव का नोटिस दिया है। वे देश में एक नए दलबदल विरोधी कानून पर चर्चा चाहते हैं। उनका कहना है कि अवसरवादिता के लिए होने वाले सामूहिक दलबदल पर रोक लगनी चाहिए। अक्सर बिना किसी वैचारिक मतभेद के सत्ता के लिए दलबदल किया जाता है। इसके साथ ही नए कानून में सांसदों और विधायकों को अपनी बात रखने की आजादी मिलनी चाहिए। उन्हें संसद के अंदर और बाहर ईमानदारी से असहमति जताने का अधिकार होना चाहिए। तिवारी का मानना है कि पार्टी व्हिप के डर के बिना जनप्रतिनिधियों को क्षेत्र की आवाज उठाने की छूट मिलनी चाहिए। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

July 29, 2026 · 2 min · National Desk