एआई की बेलगाम रफ्तार से टेक दिग्गज परेशान: सभी एक सुर में बोले- कंट्रोल छूटा तो इंटरनेट पर हो जाएगा कब्जा

एआई की बढ़ती क्षमताओं और स्वायत्तता ने अब उसके विकास की रफ्तार को लेकर टेक उद्योग, शोधकर्ताओं और सरकारों के बीच गंभीर बहस छेड़ दी है। डारियो अमोडेई ने धीमी गति, स्वतंत्र सुरक्षा मूल्यांकन और वैश्विक समन्वय की मांग की है, जिसका सैम ऑल्टमैन और एलन मस्क ने समर्थन किया। कृत्रिम बुद्धिमत्ता की दौड़ अब सिर्फ तकनीकी बढ़त की कहानी नहीं रह गई है, बल्कि इसकी रफ्तार को लेकर खुद दुनिया की बड़ी एआई कंपनियों के प्रमुखों में चिंता बढ़ने लगी है। एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोडेई ने फ्रंटियर एआई के विकास को धीमा करने की अपील की, तो ओपनएआई प्रमुख सैम ऑल्टमैन और एक्सएआई के मालिक एलन मस्क ने सार्वजनिक रूप से उनका समर्थन किया। अमोडेई का तर्क है कि एआई के फायदे असाधारण हो सकते हैं, लेकिन अगर इसकी क्षमताएं मानव नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था से कहीं तेज बढ़ीं, तो जोखिम भी उतने ही बड़े होंगे। इसी बहस में गूगल डीपमाइंड के प्रमुख वैज्ञानिक डेमिस हसबिस, एंथ्रोपिक के सलाहकार और पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक तथा अमेरिकी सीनेटर बर्नी सैंडर्स भी शामिल हो गए। अब सवाल केवल यह नहीं है कि एआई कितना तेज आगे बढ़ सकता है, बल्कि यह भी है कि उसे कितनी तेजी से आगे बढ़ना चाहिए। रफ्तार पर लगाम क्यों जरूरी? अमोडेई ने अपने ब्लॉग में कहा कि एआई मॉडल की क्षमताओं को बढ़ाने की गति धीमी करनी होगी, हालांकि इससे प्रगति रुकने वाली नहीं है। उनके मुताबिक, थोड़ी रफ्तार कम करने से समाज को सुरक्षा तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण समय मिलेगा। उन्होंने एआई के संभावित लाभ भी गिनाए—अगले 5 से 10 वर्षों में कई गंभीर बीमारियों के इलाज में बड़ी सफलता, आर्थिक विकास में तेज वृद्धि, समृद्धि और सशक्तिकरण का विस्तार तथा लोकतंत्र और स्वतंत्रता के …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

September 13, 2026 · 2 min · National Desk

दिल्ली आजकल: ब्रिक्स सम्मेलन ने लौटाया 80 के दशक वाला कनॉट प्लेस, अतिक्रमण हटते ही बदली बाजार की तस्वीर

कनॉट प्लेस का नजारा इन दिनों ऐसा है मानो दिल्ली ने अपने पुराने एलबम का एक पन्ना फिर खोल दिया हो। सफेद इमारतों के नीचे खुले गलियारे, पैदल चलने के लिए पर्याप्त जगह और दुकानों के सामने कम भीड़ ने कनॉट प्लेस को उसके पुराने रूप की याद दिला दी। फर्क सिर्फ इतना है कि 80 के दशक में यह इसकी रोजमर्रा की तस्वीर थी, जबकि अब अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के आगमन पर नजर आ रही है। ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था के तहत कनॉट प्लेस में अवैध रेहड़ियों और अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की गई। गलियारों से अस्थायी दुकानें और रेहड़ियां हटने के बाद पैदल आवाजाही के लिए जगह खुल गई। कई स्थानों पर बैठने की जगह भी साफ नजर आ रही है।भिखारियों और खुले में रहने वाले लोगों की मौजूदगी आम दिनों की तुलना में कम दिखाई दी। कार्रवाई के बाद कनॉट प्लेस का वह स्वरूप सामने आया, जिसे यहां के पुराने व्यापारी और दिल्लीवासी 80 के दशक की अपनी यादों से जोड़ते हैं। हालांकि, इस बदलाव ने व्यवस्था पर सवाल भी खड़े किए हैं। उनका सवाल है कि जब बड़े आयोजन के दौरान कुछ घंटों की कार्रवाई से बाजार के गलियारे खुले और व्यवस्थित किए जा सकते हैं, तो सामान्य दिनों में यही व्यवस्था क्यों कायम नहीं रह सकती?स्थानीय व्यापारियों के मुताबिक 80 के दशक में कनॉट प्लेस के गलियारे मुख्य रूप से पैदल आवाजाही के लिए खुले रहते थे। दुकानों के सामने पर्याप्त जगह होने से बाजार की गोलाकार संरचना भी स्पष्ट दिखाई देती थी। समय के साथ रेहड़ियों, अस्थायी दुकानों और अतिक्रमण के बढ़ने से यह जगह लगातार सिकुड़ती गई। कनॉट प्लेस स्थित एक कैफे संचालक शेखर का कहना है कि सम्मेलन के दौरान अगर पुराने स्वरूप को वापस लाया जा सकता है तो इसे केव …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

September 13, 2026 · 2 min · National Desk

श्रीनगर: ऑस्कर विजेता संगीतकार एआर रहमान ने कहा- फिल्मों में हिंसा नहीं, कश्मीर की शांति का जश्न मनाएं

कश्मीर की वादियों में अब बंदूक और बारूद की कहानी नहीं, बल्कि सुर, सिनेमा और सुकून की नई तस्वीर उभरनी चाहिए। ऑस्कर विजेता संगीतकार एआर रहमान ने शनिवार को कश्मीर को बेहद सुंदर, शांत और प्रेरणादायक जगह बताते हुए फिल्मकारों से घाटी को देखने का नजरिया बदलने की अपील की। रहमान ने कहा कि फिल्मों में कश्मीर के पुराने संघर्ष और हिंसा को दोहराने के बजाय अब यहां की प्राकृतिक सुंदरता, शांति और सद्भाव का जश्न मनाया जाना चाहिए। उनकी यह बात उस बदलते कश्मीर की तस्वीर से जुड़ती है, जिसे मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी फिल्म जगत के सामने रखने की पहल कर चुके हैं। की शूटिंग के सिलसिले में शनिवार को श्रीनगर पहुंचे रहमान ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि सिनेमा केवल कहानी कहने का माध्यम नहीं, बल्कि किसी जगह के प्रति लोगों की सोच बदलने की ताकत भी रखता है। कश्मीर की समृद्ध संस्कृति, लोक परंपराओं और खूबसूरत वादियों को दुनिया तक पहुंचाने में बॉलीवुड की बड़ी भूमिका हो सकती है।रहमान ने घाटी में आयोजित हो रहे इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल की भी सराहना की और इसे एक बेहतरीन शुरुआत बताया। उम्मीद जताई कि आने वाले समय में यह महोत्सव दुनिया के बड़े फिल्म फेस्टिवलों में अपनी पहचान बनाएगा और देश-दुनिया से लोग कश्मीर की मेहमाननवाजी, संस्कृति और सिनेमा का अनुभव लेने यहां आएंगे। उन्होंने कहा कि जिस तरह लोग एम्स्टर्डम, लंदन या सनडांस फिल्म फेस्टिवल के लिए जाते हैं, उसी तरह वे चाहते हैं कि कश्मीर भी देश के बेहतरीन फिल्म फेस्टिवलों में शामिल हो।कश्मीर को केवल संघर्ष की पुरानी छवियों के जरिए नहीं, बल्कि उसकी प्राकृतिक सुंदरता, संस्कृति और बदलती सामाजिक तस्वीर के साथ देखना होगा। इसका बेह …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

September 13, 2026 · 2 min · National Desk

ब्रिक्स की महफिल में भारत का जलवा: भरतनाट्यम से कथक तक, 160 कलाकारों ने दिखाई अपनी विरासत, क्या था खास?

ब्रिक्स देशों के अलग-अलग पारंपरिक वाद्ययंत्रों और संगीत शैलियों को एक साथ लाकर ऐसी प्रस्तुति तैयार की गई, जिसमें विविध संगीत परंपराओं के बीच तालमेल दिखाई दिया। भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपराओं और दूसरे देशों के संगीत का यह मेल अलग-अलग सभ्यताओं की विविधता और सांस्कृतिक समृद्धि को एक साथ सामने लाने की कोशिश थी। इस सांस्कृतिक कार्यक्रम की अगुवाई विदेश मंत्रालय से जुड़ी सांस्कृतिक संस्था भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) ने की, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय संस्कृति को सामने रखने का काम करती है। कार्यक्रम में संगीत और नृत्य के जरिए ब्रिक्स परिवार की अलग-अलग संस्कृतियों को जोड़ने की कोशिश की गई और भारत की सांस्कृतिक विविधता को इसकी केंद्रीय पहचान के तौर पर पेश किया गया। भारतीय कलाकारों ने भरतनाट्यम, कुचिपुड़ी, ओडिसी और कथक जैसी शास्त्रीय नृत्य शैलियों के जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों की सांस्कृतिक परंपराओं को मंच पर पेश किया। भारतीय नर्तकों के साथ देश के पारंपरिक संगीतकार भी प्रस्तुति का हिस्सा रहे और अलग-अलग भारतीय वाद्ययंत्रों की धुनों ने कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति का रंग जोड़ा।यह कार्यक्रम सिर्फ भारत की सांस्कृतिक प्रस्तुति तक सीमित नहीं था। इसमें ब्रिक्स के दूसरे सदस्य और साझेदार देशों के संगीतकारों को भी शामिल किया गया। अलग-अलग देशों की संगीत परंपराओं को भारतीय शास्त्रीय नृत्य के साथ जोड़कर एक साझा प्रस्तुति तैयार की गई। इसका उद्देश्य अलग-अलग संस्कृतियों को एक मंच पर लाना और ब्रिक्स देशों के बीच साझा सांस्कृतिक जुड़ाव को सामने रखना था।आयोजकों के मुताबिक, ‘ब्रिक्स सिम्फनी’ का मकसद अलग-अलग संगीत परंपराओं से एक साझा कलात्मक अभिव्यक्ति त …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

September 13, 2026 · 2 min · National Desk

ब्रिक्स बदलेगा दुनिया की आर्थिक व्यवस्था?: पेजेश्कियान बोले- अमेरिका का दबदबा खत्म करने के लिए बना ये संगठन

क्या ब्रिक्स अमेरिका के एकतरफा फैसलों को चुनौती देना चाहता है? पश्चिम एशिया के संघर्ष पर ईरान ने अमेरिका पर क्या आरोप लगाया? नई दिल्ली में ब्रिक्स नेताओं की बैठक के दौरान पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का मुद्दा भी सामने आया। शनिवार को अपनाए गए नई दिल्ली घोषणा पत्र में पश्चिम एशिया में बढ़ती हिंसा पर गंभीर चिंता जताई गई और अधिकतम संयम बरतने तथा विवादों के समाधान के लिए बहुपक्षीय रास्ता अपनाने की बात कही गई। इसी बीच पेजेश्कियान ने ईरान पर युद्ध शुरू करने के आरोप को खारिज किया। उन्होंने कहा कि युद्ध ईरान ने शुरू नहीं किया, बल्कि अमेरिका ने हमला शुरू किया। उन्होंने दावा किया कि ईरान के राजनीतिक और सैन्य नेताओं, वैज्ञानिकों, छात्रों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया। पेजेश्कियान ने ईरान की बाद की सैन्य कार्रवाई को आत्मरक्षा बताया। भारत और ईरान के बीच चाबहार को लेकर क्या बातचीत हुई? क्या चाबहार के जरिए भारत और ईरान का आर्थिक सहयोग बढ़ेगा? पेजेश्कियान ने कहा कि ब्रिक्स देशों को एक-दूसरे की मदद और समर्थन करना चाहिए, ताकि एकतरफावाद का मुकाबला किया जा सके। उनका कहना है कि सदस्य देशों के बीच व्यापार और आर्थिक संबंधों को इस तरह बढ़ाया जाना चाहिए कि किसी एक देश के प्रतिबंधों से पूरी व्यवस्था प्रभावित न हो। उन्होंने अमेरिका के एकतरफा रवैये को रोकने की जरूरत बताई और कहा कि ब्रिक्स का मकसद ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें देशों को व्यापार और आर्थिक सहयोग के लिए ज्यादा स्वतंत्रता मिले।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पेजेश्कियान की ब्रिक्स सम्मेलन से इतर मुलाकात में पश्चिम एशिया की स्थिति के साथ व्यापार और क्षेत्रीय संपर्क पर भी चर्चा हुई। मोदी ने कहा कि पश्च …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

September 13, 2026 · 2 min · National Desk

दिल्ली: एअर इंडिया के पूर्व पायलट वसंत कुंज के एक होटल में मृत पाए गए, केस दर्ज कर मामले की छानबीन शुरू

एअर इंडिया के पूर्व पायलट दिल्ली के वसंत कुंज उत्तर क्षेत्र में स्थित द ग्रैंड होटल के एक कमरे में बेहोश पाए गए। जानकारी के मुताबिक उन्होंने 10 सितंबर को होटल में चेक-इन किया था। साउथ वेस्ट पुलिस अधिकारियों के अनुसार 11 सितंबर की शाम को उनके भाई ने होटल मैनेजर को सूचना दी कि वे फोन का जवाब नहीं दे रहे हैं। मैनेजर कमरे तक गए तो दरवाजा अंदर से बंद पाया। मास्टर चाबी से कमरा खोला गया और अंदर कप्तान बेहोश पाए गए। पुलिस मौके पर पहुंची और उन्हें अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। जांच के लिए एक क्राइम टीम को भी मौके पर बुलाया गया। 12 सितंबर को सफदरजंग अस्पताल में पोस्टमार्टम किया गया। अंतिम पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मेडिकल राय के बाद ही मौत के सटीक कारणों का पता चलेगा। वसंत कुंज उत्तर पुलिस ने बीएनएसएस की धारा 194 के तहत जांच कार्यवाही शुरू कर दी है। आगे की जांच जारी है …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

September 13, 2026 · 1 min · National Desk

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: पीएम मोदी-जिनपिंग की मुलाकात से नई दिल्ली घोषणा तक, पहले दिन क्या-क्या हुआ?

ब्रिक्स सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई। सात साल बाद भारत आए जिनपिंग के साथ मोदी की इस मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजर थी। दोनों नेताओं ने भारत-चीन रिश्तों को दीर्घकालिक और रणनीतिक नजरिए से आगे बढ़ाने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने साफ किया कि दोनों देशों के बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन इन्हें विवाद में नहीं बदलना चाहिए। सीमा पर शांति और स्थिरता को द्विपक्षीय रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी बताया गया। दोनों पक्षों के बीच व्यापार, व्यापार असंतुलन, आपूर्ति शृंखला, लोगों के बीच संपर्क और सीमा विवाद के समाधान जैसे मुद्दों पर भी बातचीत हुई।शी जिनपिंग ने कहा कि चीन और भारत एक-दूसरे की ताकत से सीख सकते हैं और साझा विकास हासिल कर सकते हैं। उन्होंने ब्रिक्स के भीतर दोनों देशों के सहयोग को भी मजबूत करने की बात कही। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब भारत और चीन पिछले कुछ समय से सीमा पर तनाव कम करने और रिश्तों को पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं।प्रधानमंत्री मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया के संकट और समुद्री मार्गों पर पड़ रहे असर को लेकर बातचीत हुई। भारत ने संघर्षों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति को रास्ता बताया। भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा भी बातचीत में अहम रहा। रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच काला सागर क्षेत्र में भारतीय नाविकों की सुरक्षा भारत के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। दोनों देशों ने आर्थिक रिश्तों को और आगे बढ़ाने पर भी चर्चा की। भारत और रूस ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक ले जाने की …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

September 13, 2026 · 2 min · National Desk

ब्रिक्स करेंसी पर बड़ा बयान: क्या साझा मुद्रा की जगह स्थानीय करेंसी में ही होता रहेगा व्यापार? सामने आया जवाब

नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के समापन के बाद विदेश मंत्रालय ने साझा ब्रिक्स करेंसी को लेकर उठ रही तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया है। विदेश मंत्रालय में सचिव (आर्थिक संबंध) सुधाकर दलेला ने शनिवार को स्पष्ट किया कि वर्तमान में ब्रिक्स देशों के लिए एक साझा मुद्रा लाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने बताया कि सदस्य देशों का मुख्य ध्यान द्विपक्षीय व्यापार को अपनी-अपनी स्थानीय मुद्राओं में निपटाने पर केंद्रित रहेगा, जिससे लेन-देन की लागत को कम किया जा सके। साझा ब्रिक्स मुद्रा को लेकर विदेश मंत्रालय ने क्या रुख साफ किया? 18वें ब्रिक्स सम्मेलन के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए विदेश मंत्रालय के सचिव सुधाकर दलेला ने कहा कि ब्रिक्स के भीतर साझा मुद्रा बनाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्रिक्स देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार के निपटान पर काफी समय से चर्चा चल रही है और यह कोई नया विषय नहीं है। ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ में व्यापार निपटान को लेकर क्या सहमति बनी? विदेश मंत्रालय के अनुसार, स्थानीय मुद्रा में व्यापार निपटान का मुख्य उद्देश्य मौजूदा वैश्विक भुगतान और सेटलमेंट प्रणाली को बदलना या हटाना नहीं है। इसके बजाय, इसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार ढांचे के पूरक के रूप में देखा जा रहा है ताकि दो देशों के बीच होने वाले कारोबार की लागत को घटाया जा सके और समग्र वैश्विक व्यापार में सुधार किया जा सके। 18वें ब्रिक्स सम्मेलन में अपनाए गए ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ में ब्रिक्स स्थानीय मुद्राओं के माध्यम से व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए जारी चर्चाओं को स्वीकार किया गया है। घोषणापत्र में इस बात पर विशेष जोर दि …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

September 12, 2026 · 2 min · National Desk

पश्चिम एशिया संघर्ष: नई दिल्ली बना शांतिदूत, ब्रिक्स से इतर पेजेशकियन और यूएई के क्राउन प्रिंस ने की बैठक

इस मुलाकात को नई दिल्ली की ओर से कूटनीतिक स्तर पर महत्वपूर्ण पहल के तौर पर देखा जा रहा है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अपने संबोधन के दौरान पेजेशकियन ने एकतरफा और अमानवीय प्रतिबंधों का मुकाबला करने के लिए ब्रिक्स से व्यावहारिक कदम उठाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स को न्याय की आवाज बनना चाहिए।पेजेशकियन ने कहा, ‘ब्रिक्स के सदस्य देशों की जिम्मेदारी है कि वे नागरिक ढांचे और शांतिपूर्ण परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमलों को सामान्य बनाए जाने का विरोध करें, क्योंकि इन स्थलों के खिलाफ कोई भी कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए सीधा खतरा है। फलस्तीन का मुद्दा और फलस्तीनी लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार को बनाए रखना वैश्विक शासन की विश्वसनीयता और वैधता की गंभीर परीक्षा है और इसके लिए ब्रिक्स को सक्रिय भूमिका निभाने की जरूरत है।‘इससे पहले ब्रिक्स देशों ने सर्वसम्मति से नई दिल्ली घोषणा-पत्र 2026 को अपनाया। इसमें पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ रहे तनाव पर गहरी चिंता जताई गई और सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने के साथ ऐसे कदमों से बचने का आह्वान किया गया, जो स्थिति को और खराब कर सकते हैं।घोषणा-पत्र में कहा गया, ‘हम संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों के पूर्ण और परस्पर जुड़े स्वरूप के अनुसार नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह करते हैं। इसमें देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान भी शामिल है। हम संवाद और कूटनीति के माध्यम से ऐसे दीर्घकालिक समझौते की दिशा में प्रयास बढ़ाने को प्रोत्साहित करते हैं, जो क्षेत्र में स्थायी शांति, सुरक्षा और स्थिरता में योगदान दे। हम वैश्विक व्यापार, आपूर्ति शृंखला और …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

September 12, 2026 · 2 min · National Desk

खबरों के खिलाड़ी: आकाश के कभी बसपा में कभी बाहर होने से किसे फायदा? विश्लेषकों ने बताया 2027 में क्या होगा असर

रामकृपाल सिंह: मैंने उत्तर प्रदेश में जो जमीनी स्तर पर देखा है। वहां बसपा का मतलब मायावती है। जो भी घटनाक्रम हो रहे हैं वो नेताओं और पत्रकारों में चर्चा के विषय जरूर हैं, लेकिन उनके वोटर के लिए मायावती ही बसपा हैं। पूरी राष्ट्रीय राजनीति में मतदाता नेपोटिजम की राजनीति के खिलाफ है। मायावती ये संदेश देना चाहती हैं कि परिवार बाद में है, पार्टी ऊपर है। इस वजह से हो सकता है मायावती को इसका फायदा हो जाए। मायावती को इस कदम से फायदा हो न हो नुकसान नहीं हो सकता है। पूर्णिमा त्रिपाठी: मुझे लगता है कि मायावती इस वक्त एक बहुत की अनिश्चित दौर से गुजर रही हैं। वो खुद तय नहीं कर पा रही हैं कि आखिर करना क्या है? आकाश आनंद को वो बार-बार लेकर आ रही हैं और निकाल रही हैं। आकाश आनंद को अगर आप देखेंगे तो युवा दलित वोटर उनकी ओर आकार्षित हो रहा है। युवा आज हर पार्टी के लिए जरूरी बना हुआ है। अगर मायावती उन्हें बाहर करके किसी फायदे की उम्मीद कर रही हैं तो मुझे नहीं लगता इससे फायदा होगा। मुझे लगता है कि ये परिवार की खींचतान ज्यादा है। राकेश शुक्ल: आखिर ये घटनाक्रम क्यों हुआ, मेरी समझ में ये नहीं आ रहा है। अगर अशोक सिद्धार्थ इतने ईमानदार थे तो उन्हें सफाई क्यों देनी पड़ी कि मैंने पार्टी तोड़ने की कोशिश नहीं की। क्या इससे ये नहीं लगता कि चोर की दाढ़ी में तिनका। यानी मायावती को जो आशंका है वो सही है। ये सभी सवाल अशोक सिद्धार्थ के पोस्ट बाद खड़े हो गए हैं। ये भी सच्चाई है कि जब-जब बसपा कमजोर हुई है इसका फायदा भाजपा को मिला है। मायावती खुद को ममता बनर्जी नहीं बनने देना चाहती हैं। विनोद अग्निहोत्री: मायावती जिस पार्टी को लीड कर रही हैं वो एक मिशन से बनी है। कांशीराम ने अप …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

September 12, 2026 · 2 min · National Desk